Delhi News: केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू मुद्रा को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के लिए सरकारी सिक्योरिटीज पर लगने वाला कैपिटल गेन टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने यह बड़ा फैसला एक विशेष एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए लिया है। इस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था। सरकार का मुख्य मकसद देश में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना और रुपये की गिरावट को तुरंत थामना है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण दबाव बना हुआ था। इस वजह से इस साल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब ५ प्रतिशत तक कमजोर हो चुका था। सरकार ने इसे सुधारने के लिए कदम उठाया है।
राष्ट्रपति ने जारी किया नया आयकर संशोधन अध्यादेश
इस ऐतिहासिक टैक्स छूट को लागू करने के लिए राष्ट्रपति ने विशेष इनकम-टैक्स संशोधन अध्यादेश २०२६ जारी किया है। इसके माध्यम से इनकम-टैक्स एक्ट २०२५ की अनुसूची चार में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकारी बांड निवेश के लिए टैक्स-फ्री की नई कैटेगरी जोड़ी गई है।
नए बदलावों के तहत अब सरकारी सिक्योरिटीज से मिलने वाले ब्याज पर कोई कर नहीं लगेगा। इसके अलावा उनकी बिक्री, एक्सचेंज या ट्रांसफर से होने वाले मुनाफे पर भी विशेष एंटिटीज को टैक्स से पूरी राहत मिलेगी। हालांकि इसके लिए कुछ कड़े नियम भी बनाए गए हैं।
टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए निवेशकों को टैक्स अधिकारियों को सभी जरूरी वित्तीय जानकारियां देना अनिवार्य होगा। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक यह नई कर राहत व्यवस्था पूरे देश में १ अप्रैल २०२६ से प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी।
जानिए देश में क्या है मौजूदा टैक्स व्यवस्था
अगर मौजूदा टैक्स व्यवस्था की बात करें तो विदेशी निवेशकों को कई तरह के कर चुकाने पड़ते हैं। फिलहाल निवेशकों को १२ महीने से अधिक समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों और बांड्स पर १२.५ प्रतिशत की दर से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है।
इसके अतिरिक्त वर्तमान में सरकारी बांड से मिलने वाले कुल ब्याज पर २० प्रतिशत का भारी विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू है। बाजार जानकारों का कहना है कि नई टैक्स छूट मिलने से विदेशी निवेशकों के लिए कर चुकाने के बाद मिलने वाला रिटर्न काफी बेहतर होगा।
टैक्स हटने से भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज में वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी। यह फैसला निवेशकों का दायरा व्यापक करने में मदद करेगा। इससे भारतीय बाजार को बाहरी वैश्विक दबावों और आर्थिक उतार-चढ़ाव से निपटने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
विदेशी निवेशकों ने बाजार से निकाले अरबों रुपये
सरकार ने यह बड़ा कदम बेहद नाजुक समय पर उठाया है। इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल २.४७ लाख करोड़ रुपये की भारी रकम निकाली है। यह आंकड़ा साल २०२५ में हुई १.०४ लाख करोड़ रुपये की बिकवाली से दोगुने से भी अधिक है।
बाजार को इस बड़े नुकसान से बचाने के लिए वित्तीय एक्सपर्ट्स लंबे समय से टैक्स कम करने की मांग कर रहे थे। आसान शब्दों में समझें तो शेयर, म्यूचुअल फंड, बांड या प्रॉपर्टी जैसे एसेट्स को बेचने पर होने वाले शुद्ध मुनाफे पर ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।
अगर आप शेयर को १२ महीने से अधिक रखकर बेचते हैं तो वह एलटीसीजी के दायरे में आता है। इक्विटी पर इसकी दर १२.५ फीसदी है, जिसमें १.२५ लाख रुपये तक का मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। वहीं शेयर जल्दी बेचने पर २० फीसदी शॉर्ट टर्म टैक्स लगता है।
Author: Rajesh Kumar


