Delhi News: केंद्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के 12 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर देश के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़ी चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने कहा कि देश में इस समय बेरोजगारी और अल्प-रोजगार का संकट बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है।
पूर्व वित्त सचिव ने बताया कि नीतिगत खामियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र का योगदान लंबे समय से पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। उन्होंने आगाह किया कि इन गलत आर्थिक नीतियों की वजह से भारत के अब दुनिया में ‘असुरक्षित और कमजोर अर्थव्यवस्था’ की श्रेणी में पहुंचने का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
रोजगार के सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए गर्ग ने कहा कि सरकार श्रम बल के सही आंकड़े पेश नहीं कर रही है। पीएलएफएस के आंकड़ों में जो बढ़त दिखती है, वह असल में कृषि क्षेत्र और पारिवारिक उद्यमों में बिना वेतन काम करने वाले कामगारों की वजह से है। कोई भी सरकार सीधे तौर पर रोजगार नहीं दे सकती है।
चीन से निवेश की अनुमति देने पर क्यों दिया जोर?
सुभाष चंद्र गर्ग के अनुसार, सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे निजी क्षेत्र नए रोजगार पैदा कर सकें। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को 17 प्रतिशत पर स्थिर बताते हुए कहा कि अगर भारत में चीन से आने वाले निवेश की अनुमति दी जाए, तो नए उत्पादों और मशीनों के विनिर्माण को बहुत बड़ी गति मिल सकती है।
चीन से निवेश आने पर देश में हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), डिजिटल और एआई आधारित मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सौर ऊर्जा, बैटरी और ईवी के क्षेत्र में पीएलआई योजना का लगभग न के बराबर लागू होना अर्थव्यवस्था के नए क्षेत्रों में इसकी विफलता को दिखाता है।
जीडीपी ग्रोथ और डॉलर मूल्य को लेकर बड़ा दावा
अर्थव्यवस्था के पिछले 12 सालों का विश्लेषण करते हुए पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि सरकार के पहले कार्यकाल में आर्थिक प्रदर्शन काफी अच्छा था। लेकिन दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही प्रदर्शन कमजोर होने लगा। वर्तमान अमेरिकी डॉलर मूल्य पर पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार की वृद्धि दर लगभग छह प्रतिशत रही है।
यह वृद्धि दर मनमोहन सिंह सरकार के दोनों कार्यकालों की 11 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर के मुकाबले काफी कम है। डॉलर मूल्य में भारतीय इकॉनमी साल 2018-19 के 2.70 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर सात साल में मुश्किल से 3.80 ट्रिलियन डॉलर तक ही पहुंच पाई है, जिससे 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य 2028-29 से आगे खिंच गया है।
आर्थिक सुधारों और महंगाई की स्थिति पर जताई चिंता
गर्ग ने कहा कि देश में इस साल खुदरा और थोक दोनों ही क्षेत्रों में महंगाई छह से सात प्रतिशत से नीचे रहने की संभावना नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के चलते थोक मुद्रास्फीति ईंधन की बढ़ती लागत के कारण 42 महीनों के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती बनेगी।
आर्थिक सुधारों की जमीनी सच्चाई पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार केवल सुधारों की बात करती है, लेकिन असल में निजीकरण कार्यक्रम पूरी तरह ठप पड़ा है। कृषि, कच्चे माल और एमएसपी में सही बदलाव न होने से खेती सरकारी क्षेत्र जैसी बन गई है। सही मायने में सुधारों के लिहाज से यह 1991 के बाद की सबसे चिंताजनक स्थिति है।
Author: Rajesh Kumar

