Business News: देश की दिग्गज स्वर्ण कारोबारी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर बाजार नियामक सेबी ने बहुत बड़ा एक्शन लिया है। सेबी ने वित्तीय धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में कंपनी के प्रमोटर और सीईओ राजेश मेहता पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भारतीय शेयर बाजार में हड़कंप मच गया है।
राजेश एक्सपोर्ट्स ने आरोपों को बताया गलतफहमी
आभूषण रिफाइनर कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने गुरुवार को नियामक के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में दावा किया कि उसका घोषित राजस्व पूरी तरह सही है। कंपनी ने कहा कि सेबी के साथ किसी गलतफहमी के कारण यह विवाद खड़ा हुआ है।
सेबी को स्पष्टीकरण देने की तैयारी में कंपनी
बेंगलुरु स्थित इस बड़ी कंपनी ने कहा कि सेबी का यह आदेश अभी अंतरिम प्रकृति का है। इसमें कोई अंतिम प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी जल्द ही सभी जरूरी प्रमाणित दस्तावेज पेश करेगी। राजेश एक्सपोर्ट्स को पूरा भरोसा है कि दस्तावेज देखने के बाद नियामक स्थिति साफ कर देगा।
राजेश एक्सपोर्ट्स विवाद पर सियासत हुई तेज
इस बड़े कॉरपोरेट विवाद में अब कांग्रेस की एंट्री से राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस विवादित कंपनी में सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का बड़ा निवेश होना बेहद चिंताजनक है।
जयराम रमेश ने एलआईसी निवेश पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सेबी की अंतरिम रिपोर्ट चौंकाने वाली है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने पांच सालों में करीब 15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की हेराफेरी की है। उन्होंने सवाल उठाया कि एलआईसी ने इतनी बड़ी गड़बड़ी को कैसे नजरअंदाज किया।
सरकारी तंत्र के दबाव में निवेश का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स में एलआईसी की लगभग 10.8 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा कई सरकारी बैंकों ने भी इसमें जनता का पैसा लगाया है। उन्होंने पूछा कि क्या एलआईसी ने यह भारी निवेश किसी सरकारी तंत्र के इशारे या दबाव में किया था।
Author: Rajesh Kumar


