Delhi News: दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने साढ़े चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले दोषी को बेहद सख्त सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी को अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा दी है।
अदालत ने दोषी को मौत की सजा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह मामला कानून की नजर में ‘दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) श्रेणी में फिट नहीं बैठता। हालांकि, कोर्ट ने दोषी के इस घिनौने कृत्य को पूरी तरह ‘शैतानी’ करार दिया और कहा कि वह समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मात्र छह महीने में सुनाया फैसला
इस बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने मिसाल पेश की है। कोर्ट ने महज छह महीने के भीतर इस पूरे केस का ट्रायल पूरा कर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। कोर्ट ने पिछले महीने की 30 तारीख को आरोपी को दोषी ठहराया था।
अदालत ने मंगलवार को सजा का ऐलान करते हुए दोषी को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत प्राकृतिक जीवन की आखिरी सांस तक कठोर कारावास भुगतने का आदेश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने पीड़ित बच्ची के पुनर्वास और इलाज के लिए 13.5 लाख रुपये का बड़ा आर्थिक मुआवजा देने का भी निर्देश जारी किया है।
कम उम्र और साफ अतीत के कारण टली फांसी की सजा
मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने अदालत के सामने दोषी को फांसी की सजा देने की जोरदार मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि दोषी ने पड़ोस में रहने वाली एक मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।
फांसी की मांग पर अदालत ने कहा कि दोषी की कम उम्र और उसके पुराने साफ रिकॉर्ड को देखते हुए उसे मृत्युदंड देना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। हालांकि, न्यायाधीश ने यह साफ कर दिया कि दोषी किसी भी तरह की दया या नरमी का हकदार नहीं है, इसलिए उसे जीवनभर समाज से दूर रखा जाएगा।
मासूम बच्ची की तकलीफें और दर्द कल्पना से परे
यह दिल दहला देने वाली वारदात पिछले साल 17 नवंबर को हुई थी। यौन उत्पीड़न के बाद गंभीर रूप से घायल बच्ची को करीब 16 दिनों तक अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की जंग लड़नी पड़ी थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़ित मासूम की तकलीफों की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
पीड़िता की मां ने कोर्ट को रूआंसे होकर बताया कि कई जटिल सर्जरी के बाद उनकी बेटी सिर्फ तरल पदार्थ (लिक्विड) ही ले पा रही है। सर्जरी के गहरे जख्मों के कारण बच्ची न तो बैठ पा रही थी और न खड़ी हो पा रही थी। माता-पिता को नौकरी छोड़कर चौबीसों घंटे उसे अपनी गोद में रखना पड़ता था।
शराब के नशे का बहाना बनाकर दोषी ने जताया पछतावा
अदालत में सजा के बिंदु पर चल रही बहस के दौरान जब न्यायाधीश ने दोषी से सवाल पूछे, तो उसने अपना अपराध पूरी तरह स्वीकार कर लिया। दोषी ने कोर्ट के सामने रोते हुए कहा कि घटना के समय वह अत्यधिक शराब के नशे में धुत था, वरना वह ऐसा खौफनाक कदम कभी नहीं उठाता।
दोषी ने अदालत से माफी मांगते हुए अपने किए पर गहरा पछतावा भी जताया। लेकिन कोर्ट ने उसकी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि नशे की आड़ में इतने बड़े अपराध को माफ नहीं किया जा सकता। रोहिणी कोर्ट के इस त्वरित और सख्त फैसले की स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन जमकर सराहना कर रहे हैं।
Author: Raj Thakur


