भीषण गर्मी में सूख रहे हैं आपके पौधे? इन 6 मुफ्त देसी जुगाड़ से आपका गार्डन फिर हो जाएगा हरा-भरा

Lifestyle News: मई-जून की चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं न केवल हमें, बल्कि हमारे प्यारे पौधों को भी झुलसा देती हैं। यदि सही देखभाल न की जाए, तो हरे-भरे पौधे भी कुछ ही दिनों में सूखने लगते हैं। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ आसान और मुफ्त के देसी तरीकों को अपनाकर आप अपने होम गार्डन को इस भीषण गर्मी में भी सुरक्षित और तरोताजा रख सकते हैं।

1. छाया के लिए मुफ्त जुगाड़

पौधों को सीधी धूप से बचाने के लिए उन्हें छायादार जगह पर रखें। यदि पौधों को हटाना संभव नहीं है, तो आप बाजार से महंगे ‘ग्रीन नेट’ खरीदने के बजाय घर में मौजूद पुरानी सूती साड़ी, धोती या किसी हल्की चादर का उपयोग करें। यह पौधों के ऊपर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और उन्हें लू से बचाएगा।

2. वेस्ट कार्डबोर्ड से मल्चिंग

मिट्टी की नमी को भाप बनकर उड़ने से रोकने के लिए मल्चिंग सबसे प्रभावी तकनीक है। इसके लिए आप घर में बेकार पड़े कार्डबोर्ड को छोटे टुकड़ों में काटकर गमले की मिट्टी के ऊपर बिछा दें। यह कार्डबोर्ड सूरज की सीधी गर्मी को मिट्टी तक पहुँचने से रोकता है, जिससे जड़ों को ठंडक मिलती है और नमी बनी रहती है।

3. शाम के समय करें मिस्टिंग

सूरज ढलने के बाद पौधों की पत्तियों और तनों पर पानी का स्प्रे (मिस्टिंग) जरूर करें। इससे पौधों के आसपास का तापमान कम हो जाता है और उन्हें रात भर के लिए आवश्यक नमी मिलती है। आप स्प्रे बोतल का उपयोग कर सकते हैं या साधारण पाइप से फुहार मार सकते हैं। इससे पौधे रात की ठंडक में खुद को फिर से तरोताजा कर लेते हैं।

4. भारी खाद और रिपोटिंग से बचें

गर्मी के मौसम में पौधों को ‘हेवी फर्टिलाइजर’ देने की गलती कभी न करें। तनावग्रस्त पौधों में भारी खाद डालने से उनकी जड़ें जल सकती हैं। साथ ही, इस दौरान रिपोटिंग या प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे पौधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और वे सूख सकते हैं। इस समय पौधों को केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षित रखने की आवश्यकता होती है।

5. सूखते पौधों को उखाड़ने में न करें जल्दबाजी

यदि गर्मी के कारण किसी पौधे की पत्तियां गिर गई हैं या वह ऊपर से सूखा लग रहा है, तो उसे मरा हुआ मानकर फेंकने की जल्दबाजी न करें। कई पौधे तेज गर्मी से बचने के लिए ‘डॉर्मेंसी’ (सुप्तावस्था) में चले जाते हैं। उन्हें छाया में रखें और हल्का पानी देते रहें; मानसून की पहली बारिश के साथ ही वे दोबारा हरे-भरे हो सकते हैं।

Author: Karuna Sen

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