Assam News: असम विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे विकास कार्यों, लाभकारी योजनाओं और हिंदुत्व के प्रभावी समन्वय को मुख्य आधार माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने जहां एक ओर बुनियादी ढांचे और युवाओं के रोजगार पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और श्रमिक वर्ग का भरोसा जीतने में सफलता प्राप्त की है।
हिंदू मतों का ध्रुवीकरण और जनसांख्यिकीय रणनीतियां
इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण पहलू हिंदू मतदाताओं का अभूतपूर्व एकीकरण रहा है। राज्य की कुल 103 हिंदू बहुल सीटों में से भाजपा ने रिकॉर्ड 100 सीटों पर जीत दर्ज की है। जानकारों के अनुसार, अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार के सख्त रुख ने बोडो, अहोम, चाय बागान श्रमिक और आदिवासियों जैसे विभिन्न समुदायों को एक मंच पर ला खड़ा किया। 1.5 लाख बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और 1950 के कानून को लागू करने की प्रतिबद्धता ने मतदाताओं के बीच गहरा प्रभाव डाला है।
महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव
भाजपा की जीत में ‘अरुणोदय’ और ‘निजुट’ जैसी योजनाओं ने ‘गेम चेंजर’ की भूमिका निभाई है। चुनाव से ठीक पहले लगभग 40 लाख परिवारों की महिलाओं के बैंक खातों में अरुणोदय स्कीम के तहत राशि ट्रांसफर की गई। इसके अतिरिक्त, महिला उद्यमिता योजना के माध्यम से 30 लाख महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया। कॉलेज जाने वाली 5.5 लाख छात्राओं को मासिक वित्तीय सहायता देने वाली निजुट योजना ने भी युवा मतदाताओं और उनके परिवारों को सत्ता पक्ष की ओर मजबूती से मोड़ा।
बिखरी हुई कांग्रेस और विपक्ष की सांगठनिक विफलता
विपक्षी दल कांग्रेस पूरे चुनाव अभियान के दौरान आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व संकट से जूझती नजर आई। पार्टी के कई बड़े नेताओं के चुनाव से ठीक पहले साथ छोड़ने से जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट गया। विशेष रूप से, लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई की 23 हजार से अधिक मतों से हार ने कांग्रेस की कमजोर स्थिति को उजागर कर दिया है। भाजपा कांग्रेस को घुसपैठियों की समर्थक बताने में सफल रही, जिससे विपक्षी गठबंधन केवल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया।


