डीजल में उबाल के बाद बस किराए में भारी बढ़ोतरी की तैयारी? आम जनता की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की ताजा वृद्धि ने परिवहन क्षेत्र में खलबली मचा दी है। इस बढ़ोतरी के तुरंत बाद निजी बस ऑपरेटरों ने सरकार से किराए में 15 फीसदी वृद्धि की मांग उठा दी है। हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ का कहना है कि वे पहले से ही महंगाई और संचालन लागत से जूझ रहे हैं। अब डीजल के बढ़े दामों ने उनके व्यवसाय पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।

पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर न्यूनतम किराए की मांग

निजी बस ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष राजेश पराशर और अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर अपनी व्यथा सुनाई है। उन्होंने मांग की है कि हिमाचल में भी न्यूनतम बस किराया पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर 15 रुपये निर्धारित किया जाए। वर्तमान में ऑपरेटरों का दावा है कि वे घाटे में सेवाएं देने को मजबूर हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि वाहन रखरखाव, बीमा, टैक्स और कर्मचारियों के वेतन जैसे खर्च अब बेकाबू होते जा रहे हैं।

निजी बस ऑपरेटरों के अनुसार, वे प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। खासकर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सेवाएं जीवनरेखा मानी जाती हैं। डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण बसों का दैनिक संचालन अब अत्यंत कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते किराए में संशोधन नहीं किया गया, तो परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

सरकार से विशेष बैठक की अपील

संघ के उपाध्यक्ष विजय ठाकुर और महासचिव रमेश कमल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के अध्यक्षों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने आग्रह किया कि परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जल्द ही एक विशेष बैठक आयोजित की जाए। इस बैठक में निजी बस ऑपरेटरों की ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। ऑपरेटर चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का चरणबद्ध तरीके से स्थायी समाधान निकाला जाए।

शिमला, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जैसे बड़े जिलों के निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे सेवाएं दे रहे हैं। बीमा प्रीमियम और स्पेयर पार्ट्स की बढ़ती कीमतों ने पहले ही उनकी कमर तोड़ रखी है। अब डीजल की नई दरें उनके लिए व्यवसाय जारी रखना नामुमकिन बना रही हैं। यदि सरकार उनकी मांगें मानती है, तो इसका सीधा असर प्रदेश की आम जनता और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।

प्रदेश भर के निजी बस ऑपरेटरों ने एक सुर में सरकार से राहत की मांग की है। बिलासपुर, सिरमौर और चंबा के ऑपरेटरों का कहना है कि किराए में बढ़ोतरी के बिना वे इस आर्थिक बोझ को नहीं झेल पाएंगे। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हजारों निजी बसें चलती हैं जिन पर लाखों यात्री निर्भर हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार चुनाव और आम जनता के हितों को देखते हुए इस मांग पर क्या फैसला लेती है।

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