Shimla News: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक आई तेजी के बीच हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से राहत भरी खबर आई है। शहर के टैक्सी संचालकों ने ईंधन के दाम बढ़ने के बावजूद फिलहाल किराया न बढ़ाने का साहसिक निर्णय लिया है। टैक्सी यूनियन का कहना है कि वे पर्यटकों और स्थानीय लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण तेल के दामों में 3 रुपये तक का इजाफा हुआ है।
पर्यटन सीजन को देखते हुए लिया गया बड़ा फैसला
ऑल हिमाचल ज्वाइंट कमर्शियल यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मई और जून का समय पर्यटन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। शिमला में इन दिनों सीजन अपने पीक पर रहता है। यदि इस समय किराए में बढ़ोतरी की जाती है, तो इसका सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ेगा। उन्होंने घोषणा की कि यदि भविष्य में कीमतों में 5 रुपये तक की और बढ़ोतरी होती है, तब भी वे टैक्सियों का किराया नहीं बढ़ाएंगे।
टैक्सी संचालकों ने किराया स्थिर रखने के बदले सरकार के सामने एक जरूरी मांग रखी है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि वे ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करें। संचालकों का मानना है कि यदि तेल की आपूर्ति में बाधा आती है, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। वर्तमान में शिमला में पेट्रोल की कीमत 98.26 रुपये और डीजल 90.09 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। इस महंगाई ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
महंगाई की मार से सहमा मध्यम वर्ग
ईंधन की कीमतों में हुए इस इजाफे का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। राजधानी के निवासियों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सिर्फ वाहन चलाने का खर्च ही नहीं बढ़ेगा। परिवहन लागत में बढ़ोतरी होने से फल, सब्जियां और राशन के सामान भी महंगे हो सकते हैं। नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए अपने घरेलू बजट को संतुलित करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक घटनाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। जानकारों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और भी विकराल रूप ले सकती है। फिलहाल, शिमला के टैक्सी संचालकों के इस फैसले से सैलानियों को बड़ी राहत मिली है। अब सबकी निगाहें सरकारी नीतियों और वैश्विक बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।

