Rampur News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत क्याव में लोक निर्माण विभाग का एक पुल अब खौफ का पर्याय बन चुका है। सतलुज नदी पर बना यह पुल अपनी उम्र पूरी कर चुका है और वर्तमान में बेहद जर्जर स्थिति में है। पुल एक तरफ झुक गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों की जान हर वक्त खतरे में रहती है। वर्षों पहले आई बाढ़ ने इसकी नींव हिला दी थी, लेकिन प्रशासन अब तक गहरी नींद में सोया हुआ है।
सैकड़ों फीट नीचे उफनती सतलुज नदी और ऊपर डगमगाता यह पुल ग्रामीणों के लिए आवाजाही का एकमात्र जरिया है। नदी के तेज बहाव और लगातार हो रहे कटाव के कारण पुल के फाउंडेशन बेहद कमजोर हो चुके हैं। तकनीकी रूप से अनफिट होने के बावजूद इस पर से भारी संख्या में लोग गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल अब किसी भी क्षण नदी में समा सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होना तय है।
बरसात में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए एकमात्र सहारा
यह पुल क्षेत्र के बड़बोन, पा, अन्ना, कूट और सुरू जैसे कई दर्जन गांवों को आपस में जोड़ता है। बरसात के मौसम में जब पहाड़ी रास्ते और संपर्क सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हो जाती हैं, तब यही जोखिम भरा पुल ग्रामीणों का एकमात्र सहारा बचता है। स्कूली बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर रोजाना इसी पुल से गुजरते हैं। इसके अलावा पशुपालकों को भी अपने मवेशियों के साथ इसी खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार लिखित और मौखिक रूप से इस समस्या से अवगत करवाया गया है। दर्जनों बार प्रतिनिधिमंडल विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। प्रशासन की इस अनदेखी के कारण ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने विभाग की सुस्ती को देखते हुए कई बार खुद चंदा इकट्ठा कर पुल की अस्थायी मरम्मत भी की है।
सरकार को उग्र आंदोलन की चेतावनी
विजय महाटेट, मोहन मेहता और राजेश मेहता सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पुल की फाउंडेशन की तुरंत तकनीकी जांच करवाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत अब समाधान नहीं है, बल्कि यहां नए पुल का निर्माण अनिवार्य हो चुका है। सरकार को जल्द बजट स्वीकृत कर काम शुरू करना चाहिए ताकि किसी बेगुनाह की जान न जाए और क्षेत्र का संपर्क न टूटे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। छतर सिंह चौहान और फकीर चंद जैसे बुजुर्गों का कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद जागता है। रत्न डोगरा और अश्वनी कुमार ने स्पष्ट किया कि अब कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। ग्रामीणों की मांग है कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और क्याव पंचायत के लोगों को इस मौत के साये से मुक्ति दिलाएं।

