World News: अमेरिका और ईरान का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है। ईरान ने हाल ही में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-15ई को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिका ने अपने पायलट को बचाने के लिए बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया। दुश्मन की सीमा में लगातार अड़तालीस घंटे तक छिपे रहने के बाद पायलट सुरक्षित बच गया। केवल एक छोटे से डिवाइस की मदद से इस खौफनाक और नामुमकिन मिशन को सफल बनाया गया।
पायलट की जैकेट में छिपा था चमत्कारिक उपकरण
इस चमत्कारी डिवाइस का नाम कॉम्बैट सर्वाइवर इवेडर लोकेटर है। यह केवल एक साधारण रेडियो बिल्कुल नहीं है। यह असल में हथेली के आकार का एक आधुनिक कम्युनिकेशन कंप्यूटर है। इसका वजन केवल आठ सौ ग्राम होता है और इसे पायलट की जैकेट में फिट किया जाता है। विमान से बाहर कूदते समय यह खुद चालू हो जाता है। यह डिवाइस पानी के भीतर दस मीटर तक काम करता है। इसकी बैटरी पूरे इक्कीस दिनों तक चलती है।
दुश्मन के रडार को कैसे दिया सीधा चकमा?
विमान से कूदते ही यह उपकरण तुरंत एन्क्रिप्टेड संदेश भेजना शुरू कर देता है। यह लगातार अपनी सटीक लोकेशन को सुरक्षित तरीके से भेजता है। इसके लिए यह तेज फ्रीक्वेंसी बदलने वाली तकनीक का बहुत अच्छे से इस्तेमाल करता है। इस आधुनिक तकनीक के कारण चीन और रूस के सबसे उन्नत रडार भी इसे नहीं पकड़ पाए। दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉर सिस्टम के लिए यह केवल एक मामूली आवाज बनकर रह गया। इसने बिना आवाज किए संदेश भेजे।
पायलट ने कैसे बचाई अपनी और साथियों की जान?
अमेरिकी पायलट ने इस यंत्र का बहुत सूझबूझ के साथ उपयोग किया। उसने पकड़े जाने के डर से कोई भी रेडियो कॉल बिल्कुल नहीं की। उसने पहले से सेव किए गए संदेशों का इस्तेमाल करके अपनी स्थिति बताई। इस मशीन ने जीपीएस की मदद से अंधेरे में भी पायलट को सही रास्ता दिखाया। इसके बाद डिवाइस सीधे मिलिट्री सैटेलाइट से जुड़ गया। दुनिया में मौजूद चार प्रमुख रेस्क्यू केंद्रों को तुरंत पायलट के संकट की पूरी जानकारी मिल गई।
भारी गोलीबारी के बीच कमांडो ने किया रेस्क्यू
जब बचाव हेलीकॉप्टर पायलट के बहुत करीब पहुंचा तो उसने अपनी सटीक लोकेशन भेज दी। यह लोकेशन सीधा रेस्क्यू टीम के कॉकपिट सिस्टम पर दिखने लगी। इसके बाद अमेरिकी कमांडो ने अपनी जान पर खेलकर ईरान के अंदरूनी इलाके में प्रवेश किया। वहां भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने अपने इस जांबाज पायलट को सुरक्षित बचा लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना के इस बेहद साहसी और मुश्किल ऑपरेशन पर काफी ज्यादा गर्व जताया है।


