World News: बदलती वैश्विक राजनीति में अब दुनिया के बड़े फैसले केवल जी-7 देश अकेले नहीं ले सकते हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस नई सच्चाई को स्वीकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत जैसे उभरते देशों की मजबूत भागीदारी के बिना अब कोई भी वैश्विक नीति प्रभावी रूप से काम नहीं कर सकती।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने यूरोप दौरे के दौरान एक बड़ा बयान दिया है। आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन पर बात की। कार्नी ने कहा कि पुरानी व्यवस्थाएं अब पर्याप्त नहीं हैं। आज की दुनिया को समावेशी और साझा समाधान की तत्काल आवश्यकता है।
वैश्विक चुनौतियों के लिए साझा प्रयास
आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट और क्षेत्रीय संघर्ष जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। कनाडाई प्रधानमंत्री का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान सिर्फ कुछ विकसित देशों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को साथ लेकर चलना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
जी-7 शिखर सम्मेलन में इस बार भारत समेत कई गैर-सदस्य देशों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। मार्क कार्नी ने इस कदम की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि ब्राजील, मिस्र और केन्या जैसे देश वैश्विक चर्चाओं में बिल्कुल नया दृष्टिकोण लाते हैं। इससे दुनिया के लिए प्रभावी समाधान तलाशने में बहुत मदद मिलती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नए नियमों की मांग
इस अहम सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बहुत ही प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। कार्नी ने जोर देकर कहा कि एआई तकनीक काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों का अब भी भारी अभाव है। दुनिया को मिलकर इस तकनीक के जोखिम कम करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाने होंगे।
कनाडाई प्रधानमंत्री के इन बयानों से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है। आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत की भूमिका बहुत ज्यादा अहम होने वाली है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अब नई वास्तविकता के अनुसार खुद को तेजी से ढालना होगा। वैश्विक नीति निर्माण में अब भारत जैसे सशक्त देशों को नजरअंदाज करना पूरी तरह असंभव है।
Author: Pallavi Sharma


