अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में खुलासा, पाकिस्तान से सक्रिय हैं आतंकी संगठन, नाकाम रहे सैन्य अभियान

International News: अमेरिकी कांग्रेस की शोध शाखा सीआरएस ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सालों तक चले सैन्य अभियानों के बावजूद आतंकवादी समूह पाकिस्तान से सक्रिय हैं। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित कई आतंकी संगठन अभी भी पाकिस्तानी धरती से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। इन्हें हराने के प्रयास विफल रहे हैं।

आतंकी समूहों को पांच श्रेणियों में बांटा

सीआरएस कीरिपोर्ट में इन समूहों को पांच मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत और कश्मीर-केंद्रित, घरेलू मामलों पर केंद्रित और सांप्रदायिक संगठन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार सूची में शामिल 15 समूहों में से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। इनमें से अधिकतर इस्लामी चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं।

पाकिस्तान खुद भी आतंक से सबसे अधिक प्रभावित

रिपोर्ट मेंबताया गया है कि पाकिस्तान इस समय आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद उग्रवाद फिर से उभरा है। अल-कायदा इस क्षेत्र में अभी भी सक्रिय है, हालांकि उसका मुख्य ढांचा काफी कमजोर हो चुका है। इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रांत के पास अनुमानित 4,000 से 6,000 लड़ाके हैं। यह संगठन अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय है।

हक्कानी नेटवर्क और भारत विरोधी संगठन सक्रिय

हक्कानीनेटवर्क सीमा पार से अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है। इस नेटवर्क में कई सौ मुख्य सदस्य और अनुमानित 3,000 से 5,000 हथियारबंद उग्रवादी हैं। भारत पर केंद्रित कई समूह अभी भी सक्रिय हैं। 2008 के मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा और 2001 में संसद पर हमले से जुड़ा जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान की धरती से अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। ये संगठन कश्मीर की स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान सबसे खतरनाक समूह

रिपोर्ट मेंघरेलू स्तर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को सबसे खतरनाक आतंकवादी समूह बताया गया है। इसके पास अनुमानित 2,500 से 5,000 लड़ाके हैं। समूह का घोषित लक्ष्य पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकना और शरिया कानून लागू करना है। सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस की स्वतंत्र शोध शाखा है। यह कांग्रेस के सदस्यों को निर्णय लेने में मदद के लिए समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करती है। इसकी रिपोर्टों को कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं माना जाता है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories