Uganda News: युगांडा के रहने वाले 63 वर्षीय गॉडफ्रे बागूमा ने समाज के कड़वे तानों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है. उन्होंने साल 2002 में ‘दुनिया का सबसे बदसूरत आदमी’ होने का खिताब जीता था. गॉडफ्रे एक ऐसी अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं जिसे ‘स्टोन मैन सिंड्रोम’ कहते हैं.
इस भयानक बीमारी में एक छोटा सा जख्म या सामान्य फ्लू भी उनके शरीर की मांसपेशियों को हमेशा के लिए ठोस हड्डी में बदल देता है. घोर शारीरिक दर्द और लाचारी को मात देकर गॉडफ्रे ने न सिर्फ एक खुशहाल परिवार बसाया, बल्कि आज वे संगीत और कॉमेडी से दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.
दुर्लभ मेडिकल कंडीशन ने छीन लिया था बचपन का आत्मविश्वास
दुनिया भर में दस लाख लोगों में से किसी एक को होने वाली दुर्लभ बीमारी ‘एफओपी’ से पीड़ित गॉडफ्रे बागूमा ने अपनी कमियों को कभी हावी नहीं होने दिया. एक मशहूर टेलीविजन शो ‘मोस्ट एक्सट्रीम ह्यूमन्स’ में अपनी आपबीती साझा करते हुए गॉडफ्रे ने अपने जीवन के कई बड़े राज खोले.
उन्होंने बताया कि कैसे इस अनोखे खिताब ने उन्हें वह खोया हुआ आत्मविश्वास दोबारा दिया, जिसे क्रूर समाज ने उनके बचपन में ही छीन लिया था. गॉडफ्रे ने भावुक होकर कहा कि जब उन्होंने यह खिताब जीता, तो उन्हें गर्व महसूस हुआ कि वे इस दुनिया में किसी काम के हैं.
क्या होता है फाइब्रोडिस्प्लेसिया ओसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा?
फाइब्रोडिस्प्लेसिया ओसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा यानी एफओपी एक अत्यंत खतरनाक और जानलेवा स्थिति है. इस बीमारी में पीड़ित इंसान का अपना ही शरीर उसके लिए एक मजबूत लोहे का पिंजरा बन जाता है. व्यक्ति की मांसपेशियां और टिशूज धीरे-धीरे कठोर हड्डियों में तब्दील होने लगते हैं.
यह घातक प्रक्रिया बचपन से ही शरीर में अपने पैर पसारना शुरू कर देती है. इसकी शुरुआत आमतौर पर गर्दन और कंधों में तेज अकड़न के साथ होती है. समय के साथ यह बीमारी पूरे शरीर में फैल जाती है, जिससे इंसान का चलना-फिरना और सामान्य रूप से हिलना-डुलना बंद हो जाता है.
चेहरे की विकृति के बाद लोगों ने बुलाए कड़वे नाम
अगर यह बीमारी चेहरे और जबड़े के पास की मांसपेशियों को प्रभावित कर दे, तो मरीज के लिए बोलना और खाना चबाना पूरी तरह असंभव हो जाता है. गॉडफ्रे को यह बीमारी महज 10 वर्ष की उम्र में हुई थी, जब उनके गाल पर एक असामान्य सूजन आई थी.
इस सूजन ने धीरे-धीरे उनके पूरे चेहरे का रूप बिगाड़ दिया. चेहरे की इस विकृति के कारण समाज ने उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया. लोग उन्हें ‘गोरिल्ला’ और ‘बंदर’ कहकर बुलाते थे. अब गॉडफ्रे को इन कड़वे शब्दों की पूरी तरह आदत हो चुकी है और वे मुस्कुराते रहते हैं.
सच्चे प्यार की अनूठी परीक्षा में पास हुई पत्नी नमांडे
वयस्क होने तक गॉडफ्रे को अपनी इस बीमारी के नाम तक का पता नहीं था. इसी बीच उनकी जिंदगी में सच्चे प्यार ने दस्तक दी. गॉडफ्रे के आज आठ बच्चे हैं, जिनमें से छह बच्चे उनकी सुंदर जीवनसंगिनी नमांडे केट से पैदा हुए हैं. गॉडफ्रे ने अपनी पत्नी को छोड़ने की आजादी दी थी.
लेकिन नमांडे ने गॉडफ्रे के बाहरी रूप को छोड़कर उनके साफ दिल को चुना. नमांडे ने दुनिया को एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि गॉडफ्रे भले ही दिखने में सुंदर न हों, लेकिन उनका दिल बेहद खूबसूरत है. वे चाहती हैं कि लोग भी गॉडफ्रे को उनकी नजरों से देखें.
Author: Karuna Sen


