Delhi News: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक महाप्लान तैयार किया गया है। दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने, गैर-टैरिफ बाधाओं को पूरी तरह दूर करने और अगले तीन सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमत हुए हैं।
भारत सरकार के अनुसार फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल और भारी मशीनरी जैसे कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स हैं, जहां नई दिल्ली अपना एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा सकती है। यह महत्वपूर्ण सहमति व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के 14वें सत्र में बनी है।
पिछले वित्त वर्ष में हुआ करोड़ों डॉलर का व्यापार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कुल सामान का व्यापार 67.25 करोड़ डॉलर का रहा था। इस आंकड़े को अगले तीन वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए दोनों देशों की सरकारें मिलकर काम करेंगी।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय पक्ष ने पर्यटन और वाणिज्य को बढ़ावा देने के मकसद से कस्टम डेटा एक्सचेंज पर सहयोग करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही सुरक्षित और कुशल लेनदेन के लिए दोनों देशों के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आपस में जोड़ने की संभावना भी तलाशी जा रही है।
इन क्षेत्रों में भारत बढ़ाएगा अपनी सप्लाई
उज्बेकिस्तान को कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, कृषि मशीनरी, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन की सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा टेक्सटाइल, केमिकल, हेल्थकेयर, एजुकेशन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसी बिजनेस सर्विसेज को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
इस महाप्लान में फार्मास्यूटिकल्स को सबसे बड़ी प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तौर पर पहचाना गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत दुनिया भर में सस्ती और बेहतरीन क्वालिटी वाली दवाएं, जीवनरक्षक वैक्सीन और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) की सप्लाई करने के लिए जाना जाता है।
कृषि और डिजिटल सहयोग पर रहेगा विशेष ध्यान
बैठक में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने प्रोसेस्ड फूड, बीज विकास, कृषि अनुसंधान और जलवायु-अनुकूल खेती की तकनीकों में भारत की मजबूत क्षमताओं को स्वीकार किया है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आईसीटी (ICT) और डिजिटल सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद और साफ बिजली की जरूरत है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग शामिल है। इस संदर्भ में महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई सुनिश्चित करना दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग के लिए अहम माना गया है।
व्यापार की राह में आने वाली बाधाएं होंगी दूर
भारत ने कहा कि मंजूरी, स्टैंडर्ड, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन, कस्टम प्रक्रियाओं और मार्केट-एक्सेस की जरूरतों से जुड़ी गैर-टैरिफ बाधाओं की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। इससे दोनों देशों के व्यवसायों को काम करने में निश्चितता मिलेगी और रेगुलेटरी संस्थाओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो सकेगा।
व्यापार में आने वाली इन गैर-टैरिफ बाधाओं को हल करने के लिए एक समय-सीमा वाला मैकेनिज्म (Time-bound Mechanism) बनाने की वकालत की गई है। मंत्रालय का मानना है कि इस व्यवस्था से व्यापारिक बाधाएं तुरंत खत्म होंगी और दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात के नतीजों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
Author: Rajesh Kumar

