अमेरिका और ईरान के बीच महाडील तय, ट्रंप के एक गुप्त फोन कॉल से अचानक थर्रा उठा पूरा मिडिल ईस्ट

World News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी लंबे तनाव के खात्मे की ऐतिहासिक शुरुआत हो चुकी है। दोनों देश अब एक महाडील फाइनल करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते के साथ ही मुस्लिम देशों के सामने एक नई और बड़ी शर्त रख दी है।

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ट्रंप ने मुस्लिम देशों के सामने रखी नई शर्त

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब, यूएई, कतर और पाकिस्तान सहित कई देशों के शीर्ष नेताओं से फोन पर बात की। इस बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि ईरान से जंग खत्म होने के बाद अब सभी मुस्लिम देशों को इजरायल के साथ अपने राजनयिक रिश्ते सामान्य करने होंगे।

जानिए क्या है ऐतिहासिक अब्राहम अकॉर्ड्स समझौता

अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार किया गया एक ऐतिहासिक समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच पुरानी दुश्मनी को खत्म कर व्यापारिक संबंध बढ़ाना है। शुरुआत में बहरीन और यूएई जैसे देश इस खास कूटनीतिक शांति समझौते का हिस्सा बने थे।

कट्टर दुश्मन इजरायल और ईरान का पुराना इतिहास

इजरायल और ईरान के रिश्तों का पूरा सच

साल 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान और इजरायल के बीच बेहद करीबी संबंध थे। हालांकि सत्ता बदलने के बाद ईरान ने इजरायल के खिलाफ हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का एक मजबूत गुट खड़ा कर दिया। हालिया हमलों ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान को भी इस शांति समझौते में शामिल करने के संकेत दिए हैं। हालांकि इसके लिए तेहरान को सबसे पहले इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता देनी होगी। ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ अगले कुछ हफ्तों में इस मिशन पर आगे बढ़ेंगे।

सऊदी अरब के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती

सऊदी अरब के रुख पर टिकी सबकी नजरें

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सऊदी अरब और दूसरे मुस्लिम देशों को इस समझौते में शामिल होने की सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस शांति प्रस्ताव को ठुकराना इतिहास की सबसे बड़ी भूल होगी। इससे अमेरिका और मुस्लिम देशों के भविष्य के रिश्तों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक हालातों को देखते हुए उनका रुख थोड़ा ठंडा पड़ गया है। अब अमेरिकी दबाव के बीच सऊदी अरब के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

Author: Pallavi Sharma

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