London News: करीब दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद लंदन आगमन पर एयर इंडिया की उड़ान में भारतीय सहयात्रियों की भारी संख्या देखकर सुखद आश्चर्य हुआ। विमान में पारंपरिक परिधान पहने गुजराती महिलाओं का एक बड़ा समूह भी शामिल था। विदेश यात्रा करते इन नागरिकों को देखकर देश के नीति निर्माताओं से जन-अपेक्षाएं बढ़ना स्वाभाविक है।
लंदन के हवाईअड्डे से लेकर कैलिफोर्निया के एआई सेक्टर तक भारतीयों का दबदबा
लंदन के हीथ्रो हवाईअड्डे पर अब पासपोर्ट जांच अधिकारी के रूप में भी भारतीय नौजवान मुस्तैद दिखाई देते हैं। यह एक बड़ा बदलाव है कि हमारी नई पीढ़ी अब तकनीकी और कंप्यूटर आधारित उच्च पदों पर काम कर रही है। हालांकि, देश में उचित आय और सम्मानजनक आजीविका के अवसरों की कमी के कारण हमारे सबसे योग्य और शिक्षित युवा भी ‘आर्थिक शरणार्थी’ बनने पर विवश हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भारतीयों की बढ़ती संख्या इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
लंदन में बसते भारत के धनवान और बुनियादी सुविधाओं का बड़ा अंतर
भारत के कई अत्यंत समृद्ध लोग अब लंदन को अपना स्थायी निवास बना चुके हैं। वे भारत में निवेश तो करते हैं, लेकिन दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के मुकाबले लंदन में रहना अधिक पसंद करते हैं। इसका मुख्य कारण यहां मिलने वाली विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं हैं। स्वच्छ सड़कें, विशाल पार्क, प्रदूषण मुक्त शुद्ध हवा और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतें यहां आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी कमी भारतीय महानगरों में अक्सर खलती है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का बड़ा प्रदर्शन
देश के भीतर युवाओं का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र बार-बार लीक होने से परेशान होकर कई छात्रों द्वारा आत्महत्या करने जैसी दुखद खबरें सामने आई हैं। इसके विरोध में पिछले दो सप्ताह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। मुख्यधारा के मीडिया द्वारा इस विषय पर पर्याप्त चर्चा न करना और राजनेताओं की चुप्पी तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाती है।
देश के विकास मॉडल में आम नागरिकों की प्राथमिकताओं की उपेक्षा
यह एक कड़वी हकीकत है कि देश के विकास दावों के बीच आम आदमी के जीवन से जुड़ी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी संस्थाओं में कोई क्रांतिकारी सुधार नहीं आया है। जब तक शासक वर्ग और रसूखदार लोग सार्वजनिक सुविधाओं के बजाय केवल निजी क्षेत्रों पर निर्भर रहेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति में सुधार होना कठिन है। विदेशी दौरों की चकाचौंध के बीच हमें अपने देश की आंतरिक व्यवस्था को मजबूत और जवाबदेह बनाना ही होगा।

