Muzaffarabad News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सरकार के खिलाफ बड़ा विद्रोह शुरू हो गया है। आंदोलन की अगुवाई कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद तक विशाल ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने का ऐलान किया है। इससे पूरे इलाके में भारी तनाव है।
यह बड़ा फैसला पाकिस्तान प्रशासन को दी गई समय-सीमा खत्म होने के बाद लिया गया है। आंदोलनकारी नेताओं ने जेल में बंद अपने साथियों की रिहाई की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई को तुरंत रोकने की सख्त चेतावनी भी दी थी।
प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के सामने रखीं ये मुख्य मांगें
जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदर्शन और उग्र होगा। अलग-अलग जिलों से हजारों लोगों के काफिले मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे अपने 38-सूत्रीय एजेंडे से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
- गिरफ्तार किए गए नागरिक नेताओं और सभी कार्यकर्ताओं की तुरंत बिना शर्त रिहाई हो.
- सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाई बंद हो और मोबाइल इंटरनेट व संचार सेवाएं बहाल हों.
- आंदोलनकारियों द्वारा पहले से सौंपे गए 38-सूत्रीय मांग पत्र को तुरंत लागू किया जाए.
- आम जनता को बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले और स्थानीय शासन व्यवस्था में सुधार हो.
- बिजली, राशन की आपूर्ति और सभी जरूरी बुनियादी सेवाएं आम जनता तक पहुंचाई जाएं.
सुरक्षा बलों के साथ बड़े हिंसक टकराव की बन रही आशंका
मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ने वाला यह मार्च मौजूदा आंदोलन में एक बड़े मोड़ का संकेत है। इससे पाकिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह से चरमरा सकता है। इस मार्च में रावलकोट, मीरपुर, कोटली और बाग जिलों से भारी भीड़ आने की उम्मीद है, जिससे चक्का जाम हो जाएगा।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुजफ्फराबाद के चारों तरफ भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। पुलिस प्रदर्शनकारियों को राजधानी में घुसने से रोकने की पूरी कोशिश करेगी। हाल में हुई मौतों और लगातार जारी गिरफ्तारियों के कारण दोनों पक्षों के बीच भीषण खूनी झड़प होने के आसार हैं।
PoK में बिगड़े हालात, अब तक 28 लोगों की मौत
इस विरोध मार्च से पहले ही विभिन्न जिलों में 8 बड़े हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं। सुधनोती और मथियाल मेरा में हुई ताजा झड़पों में एक रेंजर्स जवान सहित 9 लोगों की मौत हो गई। पिछले महीने से अब तक कुल 28 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
इस हिंसा के कारण पूरे इलाके में आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। बाजार, स्कूल और दफ्तर बंद पड़े हैं तथा जरूरी सामान की भारी किल्लत हो गई है। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा पाकिस्तानी नेताओं पर फूट रहा है और सोशल मीडिया पर आंदोलन को भारी समर्थन मिल रहा है।
अमान खान ने कहा- आजाद नहीं, यह कब्जे वाला इलाका है
पिछले 40 दिनों से जारी इस जन आंदोलन ने पाकिस्तान के झूठे प्रचार की धज्जियां उड़ा दी हैं। आंदोलन के बड़े नेता सरदार अमान खान ने रावलकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह इलाका आजाद नहीं है।
हजारों लोगों की मौजूदगी में अमान खान ने गरजते हुए कहा कि यह कोई विवादित क्षेत्र नहीं, बल्कि पूरी तरह से कब्जे वाला इलाका है। उनके इस बयान पर जनता ने जमकर नारे लगाए। इस बयान ने पाकिस्तान के ‘आजाद कश्मीर’ वाले झूठे दावों को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है।

