अमीर और अमीर, गरीब हुआ और दाने-दाने को मोहताज, पाकिस्तान से आई इस रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंकाया!

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Islamabad News: कंगाली और बदहाली की मार झेल रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। देश के नए आर्थिक सर्वे के मुताबिक पिछले छह सालों में पाकिस्तान में गरीबी का ग्राफ सात प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है।

इस मंदी के दौर में लगभग 2.7 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं। इसके साथ ही देश में गरीबों की कुल संख्या अब बढ़कर सात करोड़ के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2018-19 में जो गरीबी 21.9 प्रतिशत थी, वह साल 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है।

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ग्रामीण और शहरी इलाकों में हाहाकार

आर्थिक सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में हालात बदतर हो चुके हैं। गांवों में गरीबी का स्तर 28.2 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 36.2 प्रतिशत पर पहुंच गया है। वहीं शहरी इलाकों में भी यह आंकड़ा 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गया है।

अगर प्रांतों के हिसाब से देखें तो बलूचिस्तान में गरीबी के कारण सबसे ज्यादा हाहाकार मचा हुआ है। बलूचिस्तान में गरीबी की दर 41.8 प्रतिशत से बढ़कर अब रिकॉर्ड 47 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। इस डरावने आंकड़े के साथ बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तान में सबसे गरीब प्रांत बन गया है।

इसके अलावा पंजाब प्रांत में गरीबी 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हो गई है। सिंध में यह आंकड़ा 24.5 से बढ़कर 32.6 प्रतिशत और खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 प्रतिशत से बढ़कर 35.3 प्रतिशत हो गया है। हालांकि चारों प्रांतों में पंजाब में गरीबी का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया है।

रिकॉर्ड-तोड़ महंगाई और आर्थिक झटके जिम्मेदार

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मिल रहे गंभीर आर्थिक झटकों के कारण देश में गरीबी इतनी तेजी से बढ़ी है। पाकिस्तान में इस समय रिकॉर्ड-तोड़ महंगाई, पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में लगातार ऐतिहासिक गिरावट और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की बेहद कड़ी शर्तें लागू हैं।

इन आर्थिक वजहों के अलावा देश में आई विनाशकारी बाढ़ और पश्चिम एशिया में चल रहे लगातार संघर्ष ने भी इस तबाही को बढ़ाने का काम किया है। इन सभी कारणों ने मिलकर देश की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है और मध्यम वर्ग को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

अमीर और गरीब के बीच बढ़ी खाई

सर्वे के आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि देश के भीतर अमीर और गरीब के बीच की खाई बहुत अधिक चौड़ी हो गई है। राष्ट्रीय गिनी गुणांक (जो आय की असमानता को मापता है) साल 2018-19 के 28.4 से बढ़कर अब साल 2024-25 में 32.7 के स्तर पर पहुंच गया है।

यह खतरनाक संकेत देता है कि देश में केवल गरीबी ही नहीं बढ़ी है, बल्कि धन का बंटवारा भी बेहद असमान हो गया है। मुल्क का चंद अमीर तबका और ज्यादा रईस होता जा रहा है, जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी रोटी और बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है।

Rajesh Kumar

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