दिल के मरीजों के लिए आई आफत! जीवन रक्षक दवा निकली नकली, सरकार ने लिया यह खौफनाक एक्शन

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Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के काला अंब में दवा सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य औषधि प्रशासन ने दिल के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक नकली इंजेक्शन का भंडाफोड़ किया है। इसके बाद सरकार ने संबंधित दवा निर्माता कंपनी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से बेहद सख्त कार्रवाई की है।

केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला (सीडीटीएल) मुंबई की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। प्रयोगशाला ने अपनी जांच में इस जीवन रक्षक इंजेक्शन को पूरी तरह नकली घोषित किया है। रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कंपनी के सभी विनिर्माण लाइसेंसों को तुरंत रद्द कर दिया है।

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लाइसेंस रद्द और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध

लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने कड़ा कदम उठाते हुए फॉर्म 25 और फॉर्म 28 के तहत जारी सभी विनिर्माण लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी द्वारा बनाए जाने वाले सभी उत्पादों की अनुमतियां भी वापस ले ली गई हैं। अब कंपनी के किसी भी उत्पाद की बिक्री नहीं होगी।

प्रशासन ने कंपनी द्वारा निर्मित और लाइसेंस प्राप्त सभी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह मामला सीधे तौर पर एडेनोसिन इंजेक्शन आईपी 6 मिलीग्राम / 2 मिलीलीटर से जुड़ा हुआ है। बाजार में यह दवा काडिर्युरेक्स नाम से बेची जा रही थी।

आपातकाल में काम आता है यह इंजेक्शन

एडेनोसिन इंजेक्शन एक बेहद महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवा है। इसका उपयोग आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में किया जाता है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के दिल की असामान्य और बहुत तेज धड़कनों को नियंत्रित करने में यह कारगर साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाओं का नकली होना जानलेवा है।

मुंबई स्थित सीडीटीएल ने इस इंजेक्शन के नमूने को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 17-बी के तहत ‘स्पुरियस’ यानी नकली दवा पाया है। सीडीटीएल देश की सबसे विश्वसनीय प्रयोगशालाओं में से एक है। यहां दवाओं की गुणवत्ता का कड़ाई से सत्यापन होता है।

जोखिम आधारित निरीक्षण में खुली पोल

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और राज्य औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी। इस टीम ने हाल ही में कंपनी का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम को विनिर्माण प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां और संदिग्ध गतिविधियां देखने को मिली थीं।

निरीक्षण के दौरान मिले इनपुट्स और प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही यह बड़ी कार्रवाई की गई है। इसके अलावा इस नकली इंजेक्शन के विदेशों में निर्यात को लेकर भी गहन जांच चल रही है। निर्यात के मामले में अलग से सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।

राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। मानकों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

Author: Sunita Gupta

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