Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पटियालकड़ पंचायत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नयना देवी माता के जंगलों में मंगलवार दोपहर बाद अचानक किसी ने आग लगा दी। तेज हवाओं के कारण इस भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया।
चीड़ का जंगल होने की वजह से इन दिनों जमीन पर भारी मात्रा में सूखी पत्तियां गिरी हुई थीं। इस वजह से आग की लपटें तेजी से फैल गईं और वन विभाग के दावों की हवा निकल गई। देर रात तक आसमान छूती लपटों को देखकर आसपास के ग्रामीण बुरी तरह सहम गए।
वन संपदा के साथ वन्य जीव भी हुए नष्ट
इस भयानक अग्निकांड के कारण पूरे कांगड़ा क्षेत्र में चारों तरफ घना धुआं फैल गया है। आग की वजह से करोड़ों रुपये की कीमती वन संपदा जलकर खाक हो गई है। इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले कई बेकसूर वन्य जीव भी जिंदा जलकर नष्ट हो गए हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।
कांगड़ा के ही नगरोटा बगवां क्षेत्र के तहत जलोट से सटे जंगलों में भी शाम के वक्त किसी अज्ञात व्यक्ति ने आग लगा दी। इस घटना के कारण पूरा वन क्षेत्र देखते ही देखते राख के ढेर में बदल गया। इसके अलावा धर्मशाला के जंगलों में भी देर रात तक आग धधकती रही।
तेज हवाओं और ब्लैकआउट से बढ़े लोगों के कष्ट
फायर सीजन शुरू होने से पहले जिला प्रशासन ने जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े-बड़े दावे किए थे। धरातल पर प्रशासन की कोई भी तैयारी काम नहीं आई। नगरोटा बगवां के स्थानीय विधायक आरएस बाली ने आग की इन बढ़ती घटनाओं को बेहद दुखद और चिंताजनक करार दिया है।
हैरानी की बात यह है कि अभी पांच जून को ही विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई थी। इसके बावजूद कोई भी स्थानीय नागरिक या पर्यावरण प्रेमी इस आग को बुझाने के लिए आगे नहीं आया। लोगों ने अपना मानवीय धर्म भी नहीं निभाया।
इस आगजनी के बीच देर रात चली तेज आंधी ने ग्रामीणों की मुसीबत को दोगुना कर दिया। खराब मौसम के चलते सुलह और नगरोटा बगवां के ग्रामीण इलाकों में रात नौ बजे के बाद पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया। बिजली गुल होने से लोगों को भीषण गर्मी में पूरी रात जागकर काटनी पड़ी।
Reported By: Sunita Gupta

