बदलेंगे वैश्विक समीकरण: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच महावार्ता, जेडी वेंस पहुंचे जेनेवा

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World News: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में एक ऐतिहासिक पहल शुरू हो रही है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित किया जा रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

यह महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में हुए एक अंतरिम शांति समझौते के बाद बुलाई गई है। इस समझौते के तहत दोनों शक्तिशाली पक्षों ने स्थायी कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए अगले 60 दिनों तक लगातार गंभीर बातचीत जारी रखने पर अपनी आपसी सहमति व्यक्त की थी।

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इस उच्च स्तरीय शांति वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व खुद देश के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। जेडी वेंस अपनी पूरी टीम के साथ स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका सबसे पहले ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच का मुद्दा उठाएगा।

परमाणु ठिकानों की जांच और 6 अरब डॉलर का फंड

शुरुआती बातचीत में अमेरिका ईरान से मांग कर सकता है कि वह अपने परमाणु प्रतिष्ठानों तक संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच प्रदान करे। आपको बता दें कि इन बेहद संवेदनशील स्थलों का अंतिम बार आधिकारिक निरीक्षण जून 2025 में किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा संबंधी इस बड़े कदम के बदले में अमेरिका ईरान को उसकी विदेशों में जमी (फ्रीज) पड़ी बड़ी संपत्तियों का एक हिस्सा देने पर विचार कर रहा है। शुरुआती चरण के तहत कतर में फंसे लगभग 6 अरब डॉलर की राशि जारी की जा सकती है।

इस भारी-भरकम राशि का उपयोग ईरान केवल खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य आवश्यक मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ही कर सकेगा। इस वार्ता में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अरागची और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती मोर्चा संभाल रहे हैं।

पाकिस्तान निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका, चुनौतियां भी बरकरार

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी इस बैठक में शामिल हैं। खास बात यह है कि इस महावार्ता में पड़ोसी देश पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी वहां उपस्थित हैं।

वार्ता की शुरुआत से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य आगे की बातचीत के लिए एक बहुत मजबूत आधार तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया के संघर्षों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति होगी।

हालांकि, इस शांति प्रक्रिया के सामने कई कठिन चुनौतियां भी मौजूद हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने साफ तौर पर आशंका जताई है कि वर्तमान क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियां और इजराइल-लेबनान के बीच जारी भारी तनाव इस महत्वपूर्ण शांति प्रयास को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।

Pallavi Sharma

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