Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने तय समय के भीतर काम पूरा न करने के कारण 15 बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का आबंटन रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि इन कंपनियों ने प्रोजेक्ट निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। इसके विपरीत सरकार ने राज्य में 3336 करोड़ रुपए की 19 नई परियोजनाओं के समझौते साइन किए हैं।
नई ऊर्जा नीति में हुआ बदलाव और रॉयल्टी दरों में संशोधन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए राज्य की नई पॉलिसी में कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब 25 मेगावाट क्षमता तक की जलविद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी की दरों को 40 वर्षों के लिए एक समान 12 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा टिडोंग चरण-1 प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
राज्य सरकार ने जियो थर्मल ऊर्जा के विकास के लिए एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी के साथ नया समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। वर्तमान में प्रदेश की कुल 24 हजार मेगावाट क्षमता में से करीब 12588 मेगावाट क्षमता की 189 परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। इससे हिमाचल प्रदेश के राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
आर्थिक समृद्धि के लिए नई बिजली परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रदेश में वर्तमान समय में 1528 मेगावाट क्षमता के 54 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तेजी से निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही करीब 7539 मेगावाट क्षमता की 526 अन्य परियोजनाएं विभिन्न प्रशासनिक चरणों में स्वीकृति के लिए प्रक्रियाधीन हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है।
नए प्रोजेक्ट्स में सोयल डाशल, खौली, ग्रामांग, उमली, भरमौर, हड़सर, टुंडह और जंगलिक जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इनके अलावा रूपिन, दुनाली, जरी, तोरल कुंडली, टुंडन और मेलन पावर प्रोजेक्ट्स पर भी जल्द काम शुरू होगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय लोगों को रोजगार देना है।

