Prayagraj News: प्रयागराज के इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में मोबाइल और लैपटॉप एक्सेसरीज की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले कुछ महीनों में चार्जर, ईयरफोन, पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड के दाम तेजी से बढ़े हैं। डिजिटल उपकरणों की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं और नौकरीपेशा लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।
बाजार में कुछ डिजिटल प्रोडक्ट्स की कीमतों में बीस से सत्तर प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो ऑनलाइन पढ़ाई या नौकरी के लिए रोज इन उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। अब छोटी चीजें खराब होने पर भी लोगों की जेब ढीली हो रही है।
चार्जर और ईयरफोन महंगे होने से बिगड़ा घरेलू बजट
डिजिटल लाइफ में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मोबाइल चार्जर और केबल अब महंगे हो गए हैं। पहले जो सामान्य चार्जर ढाई सौ से तीन सौ रुपये में मिलता था, उसकी कीमत अब चार सौ से पांच सौ रुपये तक पहुंच गई है। फास्ट चार्जिंग वाले मॉडल्स के रेट भी काफी बढ़ गए हैं।
दुकानदारों के अनुसार कंपनियों से आने वाली नई सप्लाई अब पहले से ज्यादा महंगी आ रही है। हालांकि मोबाइल यूजर्स के लिए यह खर्च शुरुआत में छोटा लगता है। इसके बावजूद बार-बार खराब होने पर इसे रिप्लेस करना मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह प्रभावित करने लगा है।
ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स पर पड़ा अतिरिक्त दबाव
ऑनलाइन क्लास, प्रोजेक्ट और डिजिटल नोट्स के कारण स्टूडेंट्स की निर्भरता गैजेट्स पर काफी बढ़ गई है। ऐसे में पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और हेडफोन उनके लिए बेहद जरूरी हो चुके हैं। मार्केट में चौंसठ जीबी और एक सौ अट्ठाईस जीबी मेमोरी कार्ड के दाम भी बढ़ गए हैं।
विद्यार्थियों के लिए यह डिजिटल एक्सेसरीज अब कोई शौक नहीं बल्कि पढ़ाई की बड़ी जरूरत बन चुकी हैं। पहले जो स्टोरेज डिवाइस कम दाम में आसानी से मिल जाते थे, अब उनके लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। इस बढ़ते खर्च से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
कंप्यूटर कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से वर्क फ्रॉम होम हुआ महंगा
वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए लैपटॉप एक्सेसरीज की कीमतें मुसीबत बन गई हैं। बाजार में माउस, कीबोर्ड, वेबकैम और हार्ड ड्राइव के दामों में तीस से सत्तर प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस कारण लोग नया सामान नहीं खरीद रहे हैं।
पैसे बचाने के लिए ज्यादातर यूजर्स अब नए गैजेट्स खरीदने के बजाय पुराने उपकरणों को रिपेयर करवा रहे हैं। हालांकि मार्केट में अब कंपोनेंट्स महंगे होने के कारण रिपेयरिंग कॉस्ट भी पहले से काफी बढ़ गई है। पूरी तरह डिजिटल सिस्टम पर निर्भर लोगों के लिए यह गंभीर समस्या है।
सप्लाई चेन प्रभावित होने से आने वाले समय में राहत के आसार कम
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल गैजेट्स महंगे होने के पीछे प्रोडक्शन कॉस्ट और ट्रांसपोर्ट खर्च का बढ़ना है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और पार्ट्स विदेशों से इंपोर्ट किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के दाम बढ़ने का सीधा असर अब घरेलू रिटेल मार्केट और ग्राहकों की जेब पर दिख रहा है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी इन कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद बहुत कम है। इलेक्ट्रॉनिक दुकान संचालक यशरथ मालवीय के अनुसार कंपनियों से मिलने वाला माल लगातार महंगा हो रहा है। इस वजह से ग्राहक अब खरीदारी से पहले बजट और क्वालिटी की गहन जांच कर रहे हैं।
