Spiritual News: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल देव का राशि परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आज 21 जून 2026 को मंगल देव साहस, ऊर्जा, भूमि और पराक्रम के कारक के रूप में वृषभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं।
मंगल देव का यह महागोचर 2 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें वे पूरे 42 दिनों तक वृषभ राशि में विराजमान रहेंगे। ग्रहों के इस बड़े बदलाव का सीधा और गहरा प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।
वृषभ राशि में मंगल का आना मनुष्य के आर्थिक फैसलों, कार्यक्षमता और स्वभाव को प्रभावित करता है। मंगल अग्नि तत्व के और वृषभ पृथ्वी तत्व की राशि है, जिससे लोगों के भीतर अचानक आक्रामकता या जल्दबाजी में निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
इन राशियों पर मंडरा रहे हैं परेशानी के काले बादल
इस 42 दिनों की संवेदनशील अवधि में कुछ विशेष राशियों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत होगी। मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ उनका वैचारिक तालमेल बिगड़ सकता है।
ज्योतिषियों के अनुसार मिथुन राशि वाले अपने अहंकार को खुद पर हावी न होने दें और वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी भी बड़े निवेश से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लें। वहीं तुला राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक तनाव लेकर आ सकता है।
तुला राशि वालों को कार्यक्षेत्र में होने वाले वाद-विवाद या ऑफिस पॉलिटिक्स से पूरी तरह बचना होगा। उनके पारिवारिक जीवन में भी कलह के संकेत हैं। इसलिए धैर्य बनाए रखना और अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना इस समय बेहद जरूरी है।
सिंह, मकर, वृश्चिक और कुंभ राशि वाले भी रहें सावधान
इन दो राशियों के अलावा सिंह, मकर, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को भी मंगल की इस नई स्थिति के कारण संभलकर रहने की जरूरत है। उन्हें अपने व्यक्तिगत संबंधों में कड़वाहट से बचना होगा और सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है।
इन जातकों को शेयर बाजार या प्रॉपर्टी में बड़ा निवेश करते समय विशेष सतर्कता बरतनी होगी। मंगल के इस भारी प्रभाव से बचने और अपनी शारीरिक ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध ज्योतिषियों ने कुछ खास उपाय और सलाह दी है।
इस दौरान कोई भी जल्दबाजी में वित्तीय निर्णय न लें। स्वभाव में आने वाले चिड़चिड़ेपन और गुस्से को शांत करने के लिए नियमित रूप से योग और गहरे ध्यान का सहारा लें। घर हो या दफ्तर, किसी भी बहसबाजी का हिस्सा न बनें और वाणी में मधुरता रखें।
Pandit Balkrishan Sharma

