अमेरिका-ईरान के बीच सीक्रेट डील से मची सनसनी, क्या ट्रंप के आगे झुक गया तेहरान? सच्चाई उड़ा देगी होश!

International News: अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। तेहरान इस पूरी स्थिति को अपनी एक बड़ी रणनीतिक और राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है। ईरानी मीडिया लगातार यह संदेश दे रहा है कि ईरान अमेरिका और इजरायल के भारी दबाव के सामने बिल्कुल नहीं झुका है।

ताकतवर देशों के आगे झुकने से इनकार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक अहम टिप्पणी की है। उन्होंने प्राचीन फारसी साम्राज्य के एक ऐतिहासिक चित्र का उदाहरण दिया है। बघाई ने लिखा है कि जिस तरह कभी शक्तिशाली रोमन साम्राज्य टूटा था, उसी तरह ईरान ने आज ताकतवर देशों के आगे घुटने टेकने से इनकार किया है।

इस पूरे मामले पर विशेषज्ञ भी अपनी बारीक नजर बनाए हुए हैं। यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की वरिष्ठ विश्लेषक एली गेरानमायेह ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले डोनाल्ड ट्रंप ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण की बात कर रहे थे। लेकिन अब अमेरिका को मजबूर होकर बातचीत के जरिए समाधान खोजना पड़ रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की मजबूत पकड़

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान खुद को इस समय बहुत मजबूत स्थिति में मान रहा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ का दुनिया को कड़ा एहसास कराया है। उसने यह साफ दिखा दिया है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को किसी भी समय गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

इस तनाव के दौरान अमेरिका और इजरायल के कई बड़े सैन्य लक्ष्य पूरी तरह सफल नहीं हो सके हैं। ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों और सर्वोच्च नेताओं की हत्या के बावजूद वहां की सत्ता व्यवस्था मजबूती से कायम है। ईरान ने यह सख्त संदेश दिया है कि वह दो बड़ी परमाणु शक्तियों का खुलकर सामना कर सकता है।

मिसाइल कार्यक्रम पर नहीं लगी कोई शर्त

संभावित शांति समझौते को लेकर कई अहम जानकारियां अभी सामने आना बाकी हैं। लेकिन फिलहाल ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर किसी बड़ी शर्त का कोई उल्लेख नहीं मिला है। इसके अलावा ईरान के सहयोगी सशस्त्र गुटों पर भी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। इस वजह से ईरान के पास इस समझौते को जीत बताने का बड़ा मौका है।

हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि ईरान की स्थिति अंदरूनी तौर पर पूरी तरह से मजबूत नहीं है। लंबे युद्ध और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण यह देश इस वक्त बेहद गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ईरान के स्टील, पेट्रोकेमिकल और कई अन्य महत्वपूर्ण उद्योगों को इन प्रतिबंधों की वजह से काफी भारी नुकसान पहुंचा है।

आर्थिक प्रतिबंधों से मिलेगी बड़ी राहत?

इस समझौते के अंतिम स्वरूप से पहले यह तय करना मुश्किल है कि असल फायदा किसे मिलेगा। लेकिन अगर समझौते के तहत ईरान को तेल निर्यात में कुछ राहत मिलती है, तो यह बड़ी बात होगी। विदेशों में जमे हुए आर्थिक फंड तक पहुंच मिलने पर तेहरान इसे घरेलू स्तर पर अपनी एक बहुत बड़ी सफलता के रूप में बेचेगा।

Author: Pallavi Sharma

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