रिटायर्ड शिक्षकों की पेंशन और GPF पर रोक, राजकीय शिक्षक संघ ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Uttar Pradesh News: प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए राजकीय शिक्षकों के लिए पेंशन और ग्रेच्युटी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। भुगतान में हो रही देरी ने शिक्षकों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। राजकीय शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए निदेशक (पेंशन) को पत्र भेजा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश में पेंशन कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।

80 फीसदी शिक्षक अब भी भुगतान से वंचित

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय वरिष्ठ संयुक्त मंत्री अनिल कुमार और संरक्षक रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने विभागीय उदासीनता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनके अनुसार, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन केवल 20 प्रतिशत शिक्षकों को ही अब तक भुगतान आदेश मिल सके हैं। शेष 80 प्रतिशत शिक्षक आज भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे रिटायर्ड शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

पटल सहायकों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

शिक्षक संगठन ने पेंशन कार्यालयों के पटल सहायकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि भुगतान आदेश जारी करने के बदले में शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए फोन किया जा रहा है। चित्रकूट के सेवानिवृत्त शिक्षक यूनुस अहमद सहित कानपुर और आजमगढ़ से भी ऐसी कई शिकायतें मिली हैं। संघ ने इसे भ्रष्टाचार का जरिया बताया है और फाइलों को जानबूझकर लटकाने का आरोप लगाया है।

निदेशक से त्वरित निस्तारण की मांग

पेंशन और जीपीएफ के लंबित मामलों को लेकर संघ ने निदेशक (पेंशन) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। मांग की गई है कि सभी अपर निदेशकों को सख्त निर्देश जारी किए जाएं ताकि एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित मामलों का निस्तारण हो सके। शिक्षकों का कहना है कि जीवन भर की सेवा के बाद अपने ही हक के पैसे के लिए इस तरह का मानसिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

राजकीय शिक्षक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन शुरू होगा। शिक्षक संघ के सदस्य प्रदेश भर के पेंशन कार्यालयों के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों ने साफ कहा है कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए। विभाग की इस कार्यप्रणाली से पूरे शिक्षक समाज में गहरा रोष व्याप्त है।

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