Uttar Pradesh News: लखनऊ की गोमतीनगर विस्तार थाना पुलिस ने पांच महीने से फरार चल रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर तारा सिंह बिष्ट को नई दिल्ली के पॉश चाणक्यपुरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़ा बिजली कनेक्शन लेने का आरोप है।
पकड़े गए शातिर आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी, जालसाजी, गैंगस्टर एक्ट और रंगदारी जैसी गंभीर धाराओं में करीब 30 आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। पुलिस उसे दिल्ली से लखनऊ ले आई है।
शनिवार को स्थानीय पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी। उसकी गिरफ्तारी से पुलिस ने बड़ी राहत की सांस ली है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किया बिजली कनेक्शन
सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) गोमतीनगर रत्नेश सिंह ने इस पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विरामखंड के निवासी वीरेंद्र कुमार सिंह ने 21 जनवरी 2026 को पुलिस के उच्च अधिकारियों से एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप था कि कुछ जालसाजों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश रची थी। उन्होंने एक गैर-पंजीकृत प्लांट को फर्जी कागजात के सहारे पंजीकृत दिखाया। इसके बाद बिजली विभाग से असली तथ्य छिपाकर नया कनेक्शन भी ले लिया।
इस गंभीर मामले की शुरुआती जांच के बाद गोमतीनगर विस्तार थाने में तारा सिंह बिष्ट और उसके अन्य साथियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाई गई थीं।
जांच शुरू होते ही दिल्ली हुआ फरार
पुलिस जांच शुरू होते ही शातिर आरोपी तारा सिंह बिष्ट लखनऊ से तुरंत फरार हो गया था। इसके बाद विवेचक की विस्तृत रिपोर्ट और कोर्ट से जरूरी अनुमति मिलने के बाद पुलिस की एक विशेष टीम दिल्ली के लिए रवाना हुई।
दिल्ली पुलिस की चाणक्यपुरी थाना टीम के सहयोग और सर्विलांस के तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी को उत्तराखंड निवास परिसर से दबोच लिया गया। शनिवार तड़के ही पुलिस टीम उसे लेकर लखनऊ के थाने पहुंची थी।
लखनऊ के कई थानों में दर्ज हैं मुकदमे
एसीपी रत्नेश सिंह ने बताया कि 55 वर्षीय तारा सिंह बिष्ट गोमतीनगर थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ साल 2003 से लेकर 2025 तक गोमतीनगर, चिनहट, वजीरगंज, महानगर और हुसैनगंज थानों में दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक तारा सिंह बिष्ट पूर्व में एक बड़ी आवासीय समिति का उपाध्यक्ष भी रह चुका है। हालांकि गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और विवादों में नाम आने के बाद उसे समिति से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
Author: Ajay Mishra


