मातृ मृत्यु दर पर लगाम की तैयारी, गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ला रही विशेष ‘हैकथॉन’ ऐप

Uttar Pradesh News: प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को शून्य पर लाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी योजना तैयार की है। अब प्रत्येक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए तकनीकी का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए ‘स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन’ एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित कर रहा है। यह ऐप गर्भधारण से लेकर प्रसव तक दी जाने वाली सभी चिकित्सीय सेवाओं का सटीक और तिथिवार ब्यौरा रखेगा, जिससे समय पर इलाज सुनिश्चित हो सके।

व्हाट्सएप आधारित होगा नया प्लेटफॉर्म

राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए ‘हैकथॉन’ नामक एक व्हाट्सएप आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रसूता का रजिस्ट्रेशन होने के बाद प्रसव की संभावित तारीख, अस्पताल का नाम और संबंधित डॉक्टर की जानकारी पहले से दर्ज होगी। इस डिजिटल डेटाबेस के जरिए सरकार सुरक्षित प्रसव से जुड़ी सभी सुविधाएं महिलाओं को घर के पास उपलब्ध कराएगी।

मातृ मृत्यु दर घटाने पर विशेष जोर

वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 97 है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 141 है। इसकी तुलना में केरल में यह मात्र 18 और तमिलनाडु में 30 है। इन आंकड़ों के बीच के अंतर को कम करने के लिए सरकार अब मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या का लाभ उठाएगी। अब अधिक से अधिक प्रसवों को बड़े अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कराने की रणनीति बनाई गई है।

मेडिकल कॉलेजों में प्रसव को प्राथमिकता

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मातृ मृत्यु के लगभग 50 प्रतिशत मामलों की मुख्य वजह अत्यधिक रक्तस्राव होता है। इसे देखते हुए सरकार की योजना है कि राज्य के 51 सरकारी और 30 निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रसव कराए जाएं। इससे प्रसव के दौरान कोई भी जटिलता आने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक जांच सुविधाओं और पर्याप्त ब्लड बैंक की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जा सकेगी।

स्वास्थ्य केंद्रों के ढांचे में बड़ा बदलाव

अभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसवों में 60 प्रतिशत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 28 प्रतिशत जिला अस्पतालों में होते हैं। शेष 12 प्रतिशत प्रसव निचले स्तर के केंद्रों पर होते हैं, जहां विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी रहती है। नई योजना के तहत राज्य के 221 जिला एवं विशिष्ट अस्पतालों को इस मिशन से जोड़कर प्रसव की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाया जाएगा।

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