कैब ड्राइवर पिता की मेहनत रंग लाई: एक बेटी बनी IAS और दूसरी CBI अफसर, बिना कोचिंग के रचा इतिहास

Uttar Pradesh News: लखनऊ की सड़कों पर कैब चलाकर अपना जीवन यापन करने वाले उपेंद्र गुप्ता के लिए आज गर्व का दिन है। उनकी दो बेटियों ने अपनी असाधारण मेहनत से गरीबी की बेड़ियों को तोड़ते हुए देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में जगह बनाई है। एक बेटी के आईएएस अधिकारी बनने के बाद अब उनकी दूसरी बेटी का चयन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में हुआ है। यह खबर सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पिता का भावुक पल

इंस्टाग्राम अकाउंट @thebharatpost द्वारा साझा किया गया एक वीडियो इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इस वीडियो को कैब में सवार एक पैसेंजर ने उस वक्त रिकॉर्ड किया जब उपेंद्र गुप्ता अपनी खुशी साझा कर रहे थे। वीडियो में वे अपनी दूसरी बेटी के सीबीआई अधिकारी बनने की खबर बताते हुए भावुक हो जाते हैं। उनकी आवाज में छिपा गर्व और आंखों की चमक यह साफ जाहिर करती है कि 15 वर्षों की कठिन तपस्या अब सफल हो चुकी है।

महंगी कोचिंग को दी मात, सेल्फ स्टडी से किया कमाल

उपेंद्र गुप्ता की बेटियों की यह सफलता उन छात्रों के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। इन दोनों बेटियों ने दिल्ली या इलाहाबाद जैसे शहरों की महंगी कोचिंग के बिना यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने घर की चारदीवारी में रहकर, इंटरनेट और सीमित किताबों के सही इस्तेमाल से तैयारी की। घंटों तक किताबों में डूबे रहकर उन्होंने साबित कर दिया कि अटूट संकल्प के आगे संसाधनों का अभाव कभी बाधा नहीं बन सकता।

आर्थिक तंगी और पिता का अटूट संघर्ष

उपेंद्र गुप्ता खुद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि उनकी बेटियों के सपने अधूरे नहीं रहेंगे। दिन-रात ट्रैफिक, शोर और प्रदूषण के बीच कैब चलाकर उन्होंने एक-एक पाई जोड़ी ताकि बेटियों को पढ़ाई का बेहतर माहौल मिल सके। गरीबी के बावजूद उन्होंने कभी बेटियों के हौसले कम नहीं होने दिए। आज जब समाज उन्हें उनके बच्चों के नाम से पहचान रहा है, तो उनका संघर्ष सार्थक नजर आता है।

देशभर के युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए इन बेटियों ने दिखाया है कि असली सपने वे हैं जो सोने नहीं देते। आईएएस और सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी का हिस्सा बनना किसी भी युवा का सबसे बड़ा सपना होता है। इन बेटियों ने न केवल अपने पिता का सीना गर्व से चौड़ा किया है, बल्कि उन लाखों लड़कियों को भी उम्मीद दी है जो विपरीत परिस्थितियों में बड़े सपने देखती हैं। सफलता की यह कहानी अनुशासन और समर्पण की जीत है।

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