Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में यमुनापार की 11 ग्राम पंचायतों को समेटकर बैठी खीरी न्याय पंचायत का ओहदा बहुत जल्द बढ़ने वाला है। प्रशासन अब इसे जिले के 24वें विकास ब्लाक के रूप में एक नई पहचान देने की व्यापक तैयारी कर रहा है।
इस नई प्रशासनिक योजना को धरातल पर उतारने के लिए कोरांव, मेजा और शंकरगढ़ के कई इलाकों को काटा जाएगा। जिला अधिकारी ने इस महत्वपूर्ण विभाजन का पूरा प्रस्ताव तैयार करके मंजूरी के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग को आधिकारिक रूप से भेज दिया है।
मुख्यालय दूर होने से ग्रामीण झेल रहे थे भारी परेशानी
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कोरांव क्षेत्र के प्रमुख और बड़े कस्बों में खीरी की गिनती काफी पहले से होती है। इसके साथ ही मेजा और शंकरगढ़ ब्लाक की सीमाएं भी इससे पूरी तरह सटी हुई हैं, जिससे यह केंद्र बिंदु बन जाता है।
खीरी और उसके पास के गांवों से इन तीनों ही पुराने ब्लाक मुख्यालयों की वास्तविक दूरी बहुत ज्यादा है। इस वजह से स्थानीय ग्रामीणों को अपने छोटे-मोटे सरकारी कामों के लिए इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था।
आयुक्त के कड़े निर्देश पर विकास विभाग ने खींचा खाका
परेशान ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास से खीरी को नया प्रशासनिक केंद्र बनाने की मांग की थी। जनता की इस जायज मांग पर संज्ञान लेते हुए विकास विभाग ने इसका पूरा खाका तैयार किया है।
प्रस्तावित नए ब्लाक खीरी के अंतर्गत कुल मिलाकर करीब 60 ग्रामीण इलाकों को शामिल करने की योजना है। इस नए ढांचे में कोरांव के करीब 25 गांव और मेजा व शंकरगढ़ के लगभग 15-15 सीमावर्ती गांवों को एक साथ जोड़ने का बड़ा प्रस्ताव है।
नए गठन से 35 किलोमीटर की दूरी घटकर रह जाएगी आधी
वर्त्तमान व्यवस्था में खीरी, खपटिहा, जोरवट, पाठकपुर, महुली और पहसला जैसे बड़े गांवों से कोरांव मुख्यालय करीब 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। नए नियमों के लागू होने से यह दूरी घटकर मात्र पांच से दस किलोमीटर के दायरे में सिमट कर रह जाएगी।
इसी तरह मेजा और शंकरगढ़ के सुजनी, कौहट, खरका, मवैया और जरखोटी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को भी अब 30 किलोमीटर का सफर नहीं करना होगा। जिला प्रशासन को अब इस नए ब्लॉक के गठन के लिए राज्य सरकार से अंतिम हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
Author: Ajay Mishra


