NH-5 पर मौत का साया! 10 बार धंसी चुकी है सड़क, निर्माण कंपनी का जुगाड़ फिर हुआ फेल

Himachal News: सोलन बाईपास पर नैशनल हाईवे-5 के पास बनी सर्विस लेन एक बार फिर गिर गई है। यह फोरलेन निर्माण कंपनी की घोर लापरवाही का बहुत बड़ा उदाहरण है। पुलिस लाइन के पास यह सड़क अब तक दस से ज्यादा बार धंस चुकी है। एनएचएआई और निर्माण कंपनी के सारे तकनीकी दावे यहां फेल हो चुके हैं। इस लगातार हो रहे भूस्खलन ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे लोगों में भारी रोष है।

बारिश ने खोली मिट्टी के दावों की पोल

निर्माण कंपनी ने हाल ही में डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया था। कंपनी ने धंसी हुई जगह पर केवल मिट्टी भरकर काम चला लिया था। लेकिन हल्की सी बारिश ने ही कंपनी के इन अस्थाई मंसूबों पर पानी फेर दिया। पानी के बहाव से मिट्टी बह गई और सर्विस लेन कई फुट नीचे धंस गई। इससे पहले भी इंजीनियरों ने कई बार डंगे बनाने की कोशिश की थी। लेकिन हर बार सड़क पर दरारें आ जाती हैं।

खतरे में है लोगों का जीवन और संपत्ति

यह टूटी हुई सर्विस लेन अब स्थानीय लोगों के लिए भारी मुसीबत बन चुकी है। यह समस्या जिला प्रशासन और खुद एनएएचआई के लिए भी बड़ा सिरदर्द है। भूस्खलन का दायरा अब बहुत ज्यादा बढ़ गया है। सड़क के नीचे मौजूद नाले तक की जमीन लगातार धंस रही है। इस भूस्खलन की चपेट में आकर एक मंदिर और एक सामुदायिक भवन पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। कथेड़ गांव को जाने वाला मुख्य मार्ग बार-बार बंद हो जाता है।

उपायुक्त के सख्त निर्देशों की उड़ी धज्जियां

इस लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सोलन के उपायुक्त ने कुछ समय पहले दौरा किया था। उन्होंने इस संवेदनशील जगह का खुद निरीक्षण किया था। उपायुक्त ने एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों को बहुत ही कड़े निर्देश दिए थे। उन्होंने इस गंभीर समस्या का एक स्थायी समाधान निकालने को कहा था। लेकिन एनएचएआई ने इन सभी निर्देशों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। अधिकारियों ने सिर्फ मिट्टी बिछाकर अपनी खानापूर्ति कर दी। इसी का नतीजा है कि सड़क धंस गई।

अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब और भारी खतरा

इस गंभीर घटना पर फोरलेन निर्माण कंपनी के अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। प्रोजेक्ट प्रभारी दिनेश पुनिया ने बताया कि सर्विस लेन की मरम्मत का काम चल रहा है। उन्होंने माना कि अभी तक केवल मिट्टी से ही फिलिंग की गई थी। अधिकारियों के अनुसार यहां अभी तक कोई पक्का डंगा नहीं लगाया गया था। कंपनी की इस सुस्त कार्यप्रणाली से जनता की जान लगातार जोखिम में है। इस बड़ी लापरवाही के कारण भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

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