Himachal News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी भूमि पर वर्षों से काबिज छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने बड़ी राहत योजना तैयार की है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में रविवार को नई अतिक्रमण नियमितीकरण नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह महत्वपूर्ण नीति केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद पूरे राज्य में लागू होगी।
सरकार ने इस नीति का लाभ उठाने के लिए कुछ विशेष प्रशासनिक शर्तें भी तय की हैं। इसके तहत पीड़ित परिवारों को कानूनी राहत तभी मिल पाएगी, जब वे अपने दावे के समर्थन में एक गवाह पेश करेंगे। इसके साथ ही उन्हें संबंधित ग्राम सभा से भी औपचारिक अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
किसे मिलेगा इस नई नीति का सीधा फायदा
राज्य सरकार की नई नीति के अनुसार, कब्जाधारी किसान को यह पुख्ता सबूत देना होगा कि वह लंबे समय से उस जमीन का उपयोग कर रहा है। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 1.67 लाख किसान ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी जमीन पर खेती या मकान के लिए कब्जा कर रखा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं गरीब किसानों को मिलेगा, जिनके पास कुल मिलाकर 20 बीघा से कम भूमि है। जिन लोगों के पास पहले से ही 20 बीघा या उससे अधिक जमीन मौजूद है, उन्हें इस नई नीति के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
फर्जी दावों को रोकने के लिए सख्त कदम
यह नीति मुख्य रूप से उन छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए बनाई गई है, जो वर्षों से सरकारी भूमि पर खेती करके अपनी आजीविका चला रहे हैं। सुक्खू सरकार इन गरीब परिवारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना चाहती है, ताकि भविष्य में उन्हें बेदखली का डर न सताए।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि इस प्रक्रिया में फर्जी दावों को रोकने के लिए कड़ा सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। केवल वही मामले स्वीकृत होंगे जो नीति के तय मानदंडों और कानूनी शर्तों को पूरा करेंगे। सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ इस अभियान को जमीन पर उतारेगी।
Reported By: Sunita Gupta


