Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार वित्तीय संकट से उबरने के लिए अब लॉटरी का सहारा लेने जा रही है। राज्य सरकार ने करीब 27 साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में दोबारा सरकारी लॉटरी शुरू करने के कड़े नियम तैयार कर लिए हैं।
वित्त विभाग ने इसके लिए बकायदा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लॉटरी चलाने का एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस नए वित्तीय प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट की आगामी बैठक में पेश किया जाएगा।
सालाना 100 करोड़ का राजस्व जुटाने का बड़ा लक्ष्य
इस नई योजना के जरिए राज्य सरकार को हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में पंजाब, सिक्किम और केरल जैसे राज्य लॉटरी के जरिए अपने सरकारी खजाने को मजबूत कर रहे हैं।
इससे पहले साल 1998 में तत्कालीन धूमल सरकार ने कथित घोटालों और सामाजिक बुराई का हवाला देकर लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसी हफ्ते होने वाली कैबिनेट बैठक में नए लॉटरी नियमों का अंतिम एजेंडा पेश किया जाएगा।
तीन महीने में पहला लकी ड्रा निकालने की तैयारी
कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही सरकार मात्र 60 दिनों के भीतर ऑपरेटर का चयन कर लेगी। इसके बाद अगले तीन महीनों में लॉटरी का पहला लकी ड्रा निकालने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस योजना के तहत ऑफलाइन पेपर लॉटरी के साथ-साथ मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन डिजिटल टिकट भी बेचे जाएंगे। राज्य के बेरोजगार युवाओं को इसका एजेंट बनाकर उन्हें एक निश्चित प्रतिशत तक कमीशन भी दिया जाएगा।
5 करोड़ रुपये तक का बंपर इनाम जीतने का मौका
वित्त विभाग ने साप्ताहिक, मासिक और बंपर ड्रा के तीन आकर्षक विकल्प रखे हैं। लॉटरी के एक टिकट की कीमत 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक तय की जा सकती है, जिससे हर वर्ग इसमें भाग ले सके।
इस योजना में न्यूनतम इनाम एक लाख रुपये और अधिकतम बंपर इनाम पांच करोड़ रुपये तक रखने का बड़ा प्रस्ताव है। लॉटरी से मिलने वाले कुल राजस्व का एक हिस्सा नशा निवारण कोष और खेल गतिविधियों पर खर्च होगा।
Author: Sunita Gupta


