हिमाचल पर 1 लाख करोड़ का कर्ज! क्या दिवालिया होने की कगार पर है सूबा? पढ़ें ये डराने वाले आंकड़े

Himachal News: हिमाचल प्रदेश गहरे आर्थिक संकट के दलदल में फंसता जा रहा है। राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ 1,01,863 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। हालत यह है कि प्रदेश के 22 में से 10 सरकारी बोर्ड और निगम भारी घाटे में चल रहे हैं। इनमें एचआरटीसी और बिजली बोर्ड की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। घाटे से उबरने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। इससे राज्य के खजाने पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

विधानसभा में सरकार ने पेश किए कड़वे सच

विधायक प्रकाश राणा, सुधीर शर्मा समेत कई नेताओं ने सदन में सवाल पूछे थे। इसके लिखित जवाब में सरकार ने यह चौंकाने वाली जानकारी दी। सरकार ने खुद माना है कि परिवहन निगम का घाटा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश पर एक लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। स्थिति इतनी गंभीर है कि इस वित्त वर्ष में सरकार को सिर्फ ब्याज चुकाने के लिए 7,272 करोड़ रुपये देने होंगे। कर्ज और ब्याज चुकाने के बाद विकास कार्यों के लिए बहुत कम पैसा बच रहा है।

केंद्र से मिलने वाले पैसे में आई भारी गिरावट

राज्य सरकार को मिलने वाले कुल राजस्व में भारी कमी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल कमाई 51,379 करोड़ रुपये थी। साल 2024-25 में यह 53,334 करोड़ रुपये रही। लेकिन 2025-26 में 31 जनवरी तक यह 45,924 करोड़ रुपये पर आ गई। केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान और करों के हिस्से में बहुत बड़ी गिरावट आई है। तीन सालों में यह राशि 14,942 करोड़ से घटकर सीधा 9,190 करोड़ रुपये रह गई है। हालांकि, राज्य की अपनी कमाई में हल्का सुधार हुआ है।

सरकार ने तीन साल में लिया 35 हजार करोड़ का लोन

खर्च पूरा करने के लिए सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। पिछले तीन वर्षों में ही 35,555 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया गया। साल 2023-24 में 12,177 करोड़ और 2024-25 में 12,276 करोड़ रुपये उधार लिए गए। चालू वित्त वर्ष में 31 जनवरी 2026 तक 11,102 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। बीते 25 फरवरी 2026 को ही सरकार ने 1030 करोड़ रुपये का एक नया लोन लिया है। इस अकेले लोन का सालाना ब्याज ही करीब 79 करोड़ रुपये बनेगा।

खजाना भरने के लिए जनता पर लगा टैक्स, खर्चों पर लगी रोक

आर्थिक तंगी से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने कई कड़े और बड़े फैसले लिए हैं। आय बढ़ाने और फालतू खर्च रोकने के लिए ये सरकारी नियम लागू किए गए हैं:

  • शराब की बिक्री पर मिल्क सेस और गौवंश उपकर लगाया गया है।
  • बिजली की खपत पर आम जनता से पर्यावरण सेस वसूला जा रहा है।
  • बोर्ड और निगमों को हर हाल में आत्मनिर्भर बनने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
  • सरकारी विभागों में अब केवल बहुत जरूरी पदों पर ही भर्तियां की जाएंगी।
  • नई गाड़ियों की खरीद पर रोक है और किराये की नई नीति लागू की गई है।
  • कर्मचारियों की हवाई यात्रा और एलटीसी (LTC) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • सरकारी वाहनों के ईंधन और अधिकारियों के फोन खर्च की एक तय सीमा बांध दी गई है।

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