Himachal News: पहाड़ी राज्यों में अब भूस्खलन और भूकंप से बेकसूर लोगों की जान नहीं जाएगी। आईआईटी मंडी के इंजीनियरों ने एक शानदार डिवाइस बनाया है। यह मशीन आपदा आने से पहले ही लोगों को चेतावनी दे देगी। इससे हादसों को आसानी से टाला जा सकेगा। घुमावदार रास्तों पर अब सफर करना ज्यादा सुरक्षित होगा।
खतरा आने से 200 मीटर पहले मिलेगा अलर्ट
अब पहाड़ों में गाड़ी चलाते समय अचानक पहाड़ दरकने का डर नहीं रहेगा। इस नई तकनीक से 100 से 200 मीटर दूर से ही खतरे का पता चल जाएगा। भूस्खलन होने की स्थिति में सड़क पर एक लाल बत्ती चमकने लगेगी। इसके साथ ही एक तेज़ हूटर बजने लगेगा। आईआईटी के ट्रेनी इंजीनियरों ने इसका नाम ‘लैंडस्लाइड रेड लाइट एंड हूटर अलर्ट सिस्टम’ रखा है। इसे बनाने में केवल 16,500 रुपये का खर्च आया है। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के लिए यह एक वरदान साबित होगा।
हाईवे पर सफल रहा इस मशीन का ट्रायल
आईआईटी के शोधकर्ताओं ने इस डिवाइस का सफल परीक्षण कर लिया है। इसे मंडी-बजौरा हाईवे पर कटौला के पास स्थित गढ़पा पहाड़ी पर लगाया गया है। यह इलाका भूस्खलन के मामले में काफी संवेदनशील माना जाता है। यहां मशीन के नतीजे पूरी तरह सटीक और सफल रहे हैं। इस बड़ी सफलता के बाद आईआईटी प्रशासन ने डिवाइस को पेटेंट करवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
कैसे काम करता है यह खास अलर्ट सिस्टम?
आईआईटी मंडी के असिस्टेंट प्रोफेसर वरुण दत्त ने इस तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम में पांच खास सेंसर नोड्स लगाए गए हैं। इसमें मिट्टी की हलचल जांचने के लिए एक्सेलेरोमीटर लगा है। गीली मिट्टी का वजन नापने के लिए फोर्स सेंसर का इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा नमी का पता लगाने के लिए मॉइस्चर सेंसर भी मौजूद है। जमीन में हल्की सी हलचल होते ही एक्सेलेरोमीटर तुरंत सक्रिय हो जाता है। इसके बाद लाल बत्ती जल जाती है और हूटर अपने आप बजने लगता है।


