हिमाचल में तेजी से कम हो रहे हैं बच्चे, बुजुर्गों की आबादी बढ़ने से क्या बदल जाएगा राज्य का भविष्य?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। इस वजह से राज्य अब तेजी से बुजुर्ग प्रधान राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में आई सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की रिपोर्ट ने इस चौंकाने वाले बदलाव को लेकर बड़े और महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी के मामले में हिमाचल देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। राज्य में बुजुर्गों की आबादी 13 प्रतिशत दर्ज हुई है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के 9.7 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। केरल और तमिलनाडु इस सूची में क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं।

हिमाचल में महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़े बुजुर्ग

आंकड़ों के अनुसार राज्य में पुरुष बुजुर्गों की आबादी 12.4 प्रतिशत है। वहीं महिला बुजुर्गों की संख्या 13.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 13.2 फीसदी है। शहरों में यह आंकड़ा 10.9 प्रतिशत है। इस बदलाव से स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर भारी दबाव बढ़ेगा।

राज्य में जन्म दर कम होने के पीछे कई प्रमुख कारण काम कर रहे हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता इसमें शामिल हैं। इसके अलावा महिलाओं में शिक्षा का प्रसार, छोटे परिवारों की बढ़ती चाहत और अविवाहितों की बढ़ती संख्या ने भी बच्चों की आबादी को काफी कम कर दिया है।

बच्चों की घटती आबादी से भविष्य में गहराएगा संकट

हिमाचल में अब 0-4 वर्ष के बच्चे सिर्फ 6.5 प्रतिशत बचे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 7.9 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में तो यह आंकड़ा घटकर महज 5.1 प्रतिशत रह गया है। बिहार में यह संख्या 11.1 प्रतिशत है। बच्चों की यह घटती संख्या हिमाचल के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

रिपोर्ट का एक और पहलू चौंकाने वाला है कि राज्य की 44.5 प्रतिशत आबादी अविवाहित है। सिर्फ 51.7 फीसदी लोग ही विवाहित हैं, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसके अलावा विधवा, तलाकशुदा या अलग रह रहे लोगों की आबादी राज्य में 3.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यही कारण जन्म दर को प्रभावित कर रहे हैं

कामकाजी आबादी मजबूत पर आगे संतुलन बिगड़ने का डर

राहत की बात यह है कि फिलहाल राज्य की कामकाजी आबादी मजबूत है। 15-59 आयु वर्ग के लोग 66.5 प्रतिशत हैं, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। शहरों में यह संख्या 71.1 प्रतिशत तक है। पुरुषों की भागीदारी 66.3 और महिलाओं की 66.8 प्रतिशत है। हालांकि भविष्य में यह संतुलन बिगड़ सकता है।

चिंता की बात यह है कि 0-14 वर्ष की आबादी घटकर 20.4 प्रतिशत रह गई है। राष्ट्रीय औसत 24 प्रतिशत का है। बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह संख्या काफी ज्यादा है। आने वाले समय में इससे स्कूलों में छात्र कम होंगे और राज्य में श्रमशक्ति का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

Author: Sunita Gupta

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