Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आईआईटी मंडी परिसर में स्थित स्कूल के संचालन विवाद पर अपना बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पुरानी स्कूल प्रबंधन कमेटी को हटाकर इसकी पूरी कमान आईआईटी मंडी प्रबंधन को सौंप दी है। इस फैसले से लंबे समय से चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है।
सिंगल बेंच से डबल बेंच तक पहुंचा मामला, पुरानी कमेटी बाहर
स्कूल के प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रहा यह कानूनी विवाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से होता हुआ डबल बेंच तक पहुंचा था। कोर्ट के ताजा आदेश के बाद पुरानी कमेटी अब स्कूल की दैनिक गतिविधियों में कोई हस्तक्षेप नहीं कर पाएगी। हालांकि असंतुष्ट पक्ष के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला है।
आईआईटी प्रबंधन ने अदालती आदेश मिलते ही स्कूल के संचालन और दाखिला प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले लिया है। कानूनी विवादों के बीच ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इस स्कूल को मान्यता दे दी थी। मान्यता मिलने के बाद छह मई से ही नई प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित, बच्चों और अभिभावकों की चिंताएं दूर
स्कूल में फिलहाल तीन सौ से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस विवाद के कारण अभिभावक और छात्र अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे। आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे ने बताया कि नई मैनेजमेंट कमेटी सभी हितधारकों के हितों की पूरी रक्षा करेगी।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वे स्कूल के किसी भी पुराने कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकालेंगे। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही छात्रों की पढ़ाई सामान्य रूप से जारी रहेगी। इससे बच्चों के माता-पिता ने बड़ी राहत की सांस ली है और स्कूल का माहौल सुधरा है।
साल 2017 से शुरू हुआ था विवाद, जानिए पूरा घटनाक्रम
इस विवाद की शुरुआत साल 2017 में कैंपस के भीतर स्कूल खोलने के समझौते के साथ हुई थी। साल 2019 में दोनों पक्षों के बीच 33 साल की लीज डीड पर दस्तखत हुए थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन साल 2022 में नई स्कूल मैनेजिंग कमेटी बनने के बाद टकराव शुरू हो गया।
पुरानी कमेटी का आरोप था कि आईआईटी के प्रतिनिधि स्कूल के रोजमर्रा के कामों में दखल दे रहे थे। इसके बाद मई 2024 में रजिस्ट्रार ने एग्रीमेंट रद्द करने का नोटिस जारी कर दिया। अप्रैल 2026 में आईआईटी ने खुद एडमिशन शुरू किए, जिसे अब कोर्ट ने वैध ठहराया है।
Author: Sunita Gupta


