Himachal High Court Decision: बाहरी राज्यों की डिग्री पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि बाहरी राज्यों से प्राप्त वैध डिग्री या डिप्लोमा को राज्य सरकार अमान्य नहीं कर सकती। केवल प्रदेश सरकार से मान्यता न होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

नौकरी प्रक्रिया में बाहरी राज्यों के डिप्लोमा को बड़ी राहत

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने रुमा देवी और अन्य आवेदकों की याचिका स्वीकार करते हुए यह अहम व्यवस्था दी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों के पास मौजूद शैक्षणिक योग्यता पूरी तरह वैध होनी चाहिए। इसके साथ ही वह संबंधित राज्य के प्राधिकृत निकाय से मान्यता प्राप्त होनी जरूरी है।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार या एससीवीटी (SCVT) से मान्यता मिलना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि किसी नागरिक के पास देश के किसी भी प्रामाणिक संस्थान का वैध डिप्लोमा है, तो वह राज्य की भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पूरी तरह पात्र माना जाएगा।

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही कि याचिकाकर्ताओं के संस्थान फर्जी हैं। सरकार ऐसा कोई सबूत नहीं दे सकी जिससे पता चले कि ये संस्थान अपने गृह राज्य में विधिवत मान्यता प्राप्त नहीं थे। इसलिए युवाओं को हक से वंचित नहीं कर सकते।

पंचकर्म पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति पर विचार करने के निर्देश

माननीय अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को कानून की नजर में पूरी तरह अमान्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही पीठ ने विभाग को निर्देश दिए कि वे याचिकाकर्ताओं की पंचकर्म कर्मियों के पदों पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारी पर नए सिरे से विचार करें। इससे कई बेरोजगार युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।

न्यायालय ने माना कि यदि कोई संस्थान पूरी तरह फर्जी है, तो विभाग निश्चित रूप से पात्रता खारिज कर सकता है। लेकिन संबंधित राज्य से मान्यता प्राप्त संस्थान के सर्टिफिकेट को सिर्फ इसलिए नहीं ठुकराया जा सकता कि उसे हिमाचल प्रदेश सरकार की सूची में जगह नहीं मिली है।

इस मामले में राज्य सरकार का तर्क था कि भर्ती और पदोन्नति नियमों के तहत केवल हिमाचल सरकार से स्वीकृत डिप्लोमा ही मान्य होते हैं। सरकार ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं के पास बाहरी राज्यों के संस्थान के सर्टिफिकेट थे, इसलिए उन्हें भर्ती प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित किया गया था।

Author: Sunita Gupta

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