Shimla News: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने अपने चालकों और परिचालकों के लिए बेहद सख्त नियम लागू किए हैं। नए फरमान के तहत अब ड्यूटी के समय गले या सिर पर रंग-बिरंगा कपड़ा बांधने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आदेशों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
वर्दी के साथ रंग-बिरंगा कपड़ा पहनने पर लगी पूरी रोक
एचआरटीसी प्रबंधन का मानना है कि निर्धारित वर्दी के साथ गमछा या परना लपेटने से कर्मचारियों की प्रोफेशनल छवि खराब होती है। इस संबंध में राज्य के कई डिपो प्रमुखों ने लिखित सर्कुलर जारी कर दिए हैं। सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को इन नए नियमों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
परिवहन निगम ने अपने कर्मचारियों के लिए पहले से ही एक विशेष पोशाक निर्धारित कर रखी है। प्रबंधन का तर्क है कि सभी स्टाफ सदस्यों को बेहद अनुशासित और एक समान रूप में दिखना चाहिए। यह नया कदम निगम की साख को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हिमाचल के अलावा सात अन्य राज्यों में चलती हैं एचआरटीसी बसें
हिमाचल परिवहन निगम की बसें केवल पहाड़ी प्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं। ये गाड़ियां पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों में भी रोजाना जाती हैं। इसके अतिरिक्त जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई रूटों पर भी निगम की बसों का नियमित संचालन होता है।
दूसरे राज्यों में जाने के कारण ड्राइवर और कंडक्टर सीधे तौर पर पूरे हिमाचल प्रदेश की छवि को प्रदर्शित करते हैं। ऐसे में उनकी वेशभूषा का अनुशासित होना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी वजह से उच्च अधिकारियों ने ड्रेस कोड को लेकर इतनी कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है।
निगम के नए आदेश का कर्मचारी संगठनों ने शुरू किया विरोध
दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों ने इस नए नियम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हिमाचल पथ परिवहन मजदूर संघ ने इस आदेश को पूरी तरह अव्यावहारिक बताते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रबंधन मूल समस्याओं को सुलझाने के बजाय बेवजह परेशान कर रहा है।
यूनियन के नेताओं के मुताबिक ड्राइवर और कंडक्टर मैदानी इलाकों में लंबी दूरी की बसें चलाते हैं। गर्मियों के मौसम में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसी भीषण गर्मी में पसीना पोंछने के लिए सूती कपड़ा पास रखना बेहद जरूरी होता है।
नियमों की अवहेलना करने पर होगी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी उपक्रम के पास वर्तमान में लगभग 3200 बसें हैं। इन गाड़ियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 11 हजार ड्राइवर और कंडक्टर तैनात हैं। प्रबंधन ने साफ किया है कि सभी कर्मचारियों को इन आदेशों को मानना ही होगा।
सर्कुलर के अनुसार यदि कोई भी कर्मचारी नियमों की अवहेलना करता हुआ पाया गया, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। नियमों को न मानने वाले स्टाफ के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इस फैसले के बाद अब प्रबंधन और कर्मचारी आमने-सामने आ गए हैं।
Author: Sunita Gupta

