रूसी सेना में क्यों भर्ती हुए भारतीय नागरिक? केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में खोले चौंकाने वाले बड़े राज

Delhi News: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। सरकार ने अदालत को बताया कि रूस ने भारतीय नागरिकों को अपनी सेना में भर्ती करने के लिए बड़े प्रलोभन दिए। इनमें भारी-भरकम वित्तीय पैकेज, सामाजिक सुरक्षा, नागरिकता और जेल की सजा माफी जैसे आकर्षक प्रस्ताव शामिल थे।

लाखों के वेतन और मुआवजे का मिला प्रलोभन

केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि कई भारतीयों ने स्वेच्छा से रूसी सेना के साथ अनुबंध किया था। इन युवाओं को लगभग 5,000 अमेरिकी डॉलर का अग्रिम साइनिंग बोनस मिला था। इसके साथ ही उन्हें 2,500 अमेरिकी डॉलर का मासिक वेतन देने का बड़ा वादा भी किया गया था।

रूसी सरकार ने इसके अलावा इन नागरिकों को रूस की पक्की नागरिकता देने की बात कही थी। उन्हें कई तरह के सामाजिक लाभ देने का भरोसा भी दिया गया था। सबसे बड़ा प्रलोभन यह था कि युद्ध में मौत होने की स्थिति में परिवार को 1,68,000 अमेरिकी डॉलर का मुआवजा मिलना था।

जेल की सजा से माफी के लिए बने सैनिक

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ भारतीय छात्र रूस की जेलों में बंद थे। किशोर सरवनन और साहिल महामदुसेन मजोथी जैसे छात्रों ने नारकोटिक्स मामलों में जेल की सजा काटते समय यह रास्ता चुना। उन्होंने जेल से माफी पाने के लालच में आकर रूसी सेना के साथ सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

भारत सरकार के कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद सरवनन को रूसी सेना से मुक्त करा लिया गया था। हालांकि वह भारत वापस नहीं आया और उसने रूस की नागरिकता ले ली। वहीं दूसरी ओर मजोथी ने यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। भारत सरकार इस समय यूक्रेन से लगातार बातचीत कर रही है।

लापता और मृत भारतीयों के लिए उठाए कदम

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को याचिका में शामिल 26 भारतीय नागरिकों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। सरकार ने बताया कि इनमें से 14 नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि 11 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं एक अन्य व्यक्ति को छेड़छाड़ के मामले में आठ साल की सजा हुई है।

रूसी अधिकारियों के अनुसार युद्ध क्षेत्र से फिलहाल शवों को निकालना बेहद मुश्किल है। लापता लोगों की तलाश और शवों की पहचान के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। इसके लिए सरकार ने 21 पीड़ित परिवारों के डीएनए नमूने लेकर जांच के लिए रूसी अधिकारियों के पास भेज दिए हैं।

भारत सरकार पीड़ित परिवारों की मदद के लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड का इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत अब तक 48 नागरिकों को भारत लौटने के लिए हवाई टिकट दिए गए हैं। सरकार मृतकों के परिवारों को रूसी प्रशासन से मुआवजा दिलाने के लिए लगातार सक्रिय रूप से काम कर रही है।

अब तक रूसी दूतावास के माध्यम से भेजे गए चार दावों में से एक को मंजूरी मिल चुकी है। उस परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान भी कर दिया गया है। इसके अलावा स्वतंत्र रूप से जमा किए गए तीन अन्य दावों को भी मंजूरी मिल गई है और परिवारों को पैसा मिल चुका है।

Author: Pallavi Sharma

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