Shimla Heritage Gate Down: शिमला का 182 साल पुराना ऐतिहासिक यूएस क्लब गेट जमींदोज, हाईकोर्ट ने लिया बड़ा एक्शन

Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां के ऐतिहासिक यूएस क्लब के मुख्य प्रवेश द्वार को सड़क चौड़ीकरण के दौरान पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।

हाईकोर्ट ने इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़े जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम शिमला को इस संबंध में नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस पर विस्तृत जवाब मांगा है।

साल 1844 में बना था शिमला का यह ऐतिहासिक गेट

अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव और नगर निगम शिमला के आयुक्त को तलब किया है। खंडपीठ ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में इस ऐतिहासिक गेट को गिराया गया। आपको बता दें कि इस शानदार यूएस क्लब और उसके गेट का निर्माण साल 1844 में हुआ था।

यह मामला तब अदालत पहुंचा जब विभिन्न समाचार पत्रों में इस प्राचीन गेट को तोड़े जाने की खबरें छपीं। वकील देवेन खन्ना ने इन मीडिया रिपोर्टों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर लिया।

पारंपरिक पहाड़ी शैली का अनोखा प्रतीक था प्रवेश द्वार

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिज मैदान से महज 500 मीटर दूर स्थित यह द्वार शहर की खास पहचान था। औपनिवेशिक काल की यह सुंदर संरचना पारंपरिक पहाड़ी शैली में बनी थी। इसे बनाने में पत्थर, मजबूत लकड़ी और स्लेट की खूबसूरत छत का इस्तेमाल किया गया था।

अदालत ने कहा कि सड़क चौड़ी करने के लिए यदि इसे हटाना जरूरी भी था, तो भी इसका मूल स्वरूप संभाल कर रखना चाहिए था। विभाग को इसे दोबारा उसी डिजाइन में बनाने की योजना तैयार करनी चाहिए थी। बिना किसी ठोस योजना के ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना गलत है।

कठोर कार्रवाई पर अधिकारियों को देना होगा जवाब

अदालत में पीडब्ल्यूडी की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रणय प्रताप सिंह और नगर निगम की तरफ से वकील विवेक शर्मा ने नोटिस स्वीकार किए। दोनों पक्षों ने कोर्ट से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

हाईकोर्ट ने प्रशासन की इस कार्रवाई को “कठोर कदम” बताया है। कोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि क्या इस गेट को बचाने के लिए किसी दूसरे विकल्प पर विचार किया गया था। इस बड़े मामले की अगली सुनवाई अब 29 जुलाई को तय की गई है।

Author: Sunita Gupta

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