Delhi News: होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक हमलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। इन हमलों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तीखा कूटनीतिक विवाद छिड़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर सीधे आरोप लगाए हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर भारतीय जहाजों को टारगेट करने का आरोप लगाने के बाद तेहरान ने बेहद कड़ा पलटवार किया है। भारत में स्थित ईरान के दूतावास ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा बताया है।
ईरानी दूतावास ने अमेरिकी सैन्य एक्शन पर उठाए गंभीर सवाल
ईरानी एम्बेसी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यह आरोप सच से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक हफ्ते में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण तीन भारतीय जहाज प्रभावित हुए हैं। इस गंभीर गोलाबारी में तीन बेकसूर भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई।
ईरान के अनुसार अमेरिका अपनी आक्रामक सैनिक कार्रवाई के बुरे नतीजों को छुपाने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ रहा है। दूतावास ने कहा कि निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत एक बेहद दुखद और शर्मनाक घटना है। इस कृत्य के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर दर्ज कराया विरोध
इस बड़े घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने भी बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। नई दिल्ली ने अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया। भारत ने साफ लफ्जों में कहा कि कमर्शियल जहाजों पर ऐसे हिंसक हमले किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।
भारत ने एक ही हफ्ते के भीतर दूसरी बार अमेरिकी अधिकारियों के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरीवेक्स’ पर बड़ा हमला हुआ था। हालांकि, राहत की बात रही कि 24 भारतीय नाविक सुरक्षित बच गए।
तीन भारतीय नाविकों की मौत से देश में भारी आक्रोश
इसके ठीक बाद 10 जून को पलाऊ के ही दूसरे टैंकर ‘सेटेबेलो’ को निशाना बनाया गया। इस दर्दनाक हमले में सवार 24 भारतीय क्रू मेंबर्स में से तीन नाविकों की जान चली गई। इसके बाद गिनी-बिसाऊ के टैंकर ‘जलवीर’ पर भी हमला हुआ, जिसमें 20 भारतीय सवार थे।
इन लगातार हो रहे हमलों ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। खाड़ी के इस पूरे समुद्री क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और व्यापारिक जहाज हमेशा एक्टिव रहते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग पर असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।
अमेरिकी सेना का दावा: हमने मार गिराए ईरानी ड्रोन
दूसरी तरफ, अमेरिकी मिलिट्री कमांड ‘सेंटकॉम’ ने एक बिल्कुल अलग दावा पेश किया है। सेंटकॉम के अनुसार ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजर रहे कमर्शियल जहाजों को तबाह करने के लिए कई सुसाइड ड्रोन भेजे थे। अमेरिकी नौसेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन सभी ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया।
अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकेबंदी के नियमों का उल्लंघन करने वाले नौ जहाजों को निष्क्रिय किया गया है। वहीं नियमों का पालन करने वाले 139 जहाजों का रूट बदला गया। इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष के सामने भारतीय नाविकों की मौत पर गहरी संवेदना और नाराजगी जताई। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नागरिक जहाजों पर किसी भी तरह का सैन्य एक्शन बर्दाश्त नहीं होगा। इन घटनाओं ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
Author: Harikarishan Sharma


