New Delhi News: देश की सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों के भारी बोझ और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने एक हत्या के मामले का उदाहरण देते हुए इसे देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक अत्यंत असाधारण और गंभीर स्थिति करार दिया है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने इस संकट पर सोमवार को सुनवाई की। अदालत ने पूछा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमों के इस अंबार से निपटने के लिए क्या नए उपाय किए जा सकते हैं, ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।
भाई की हत्या के मामले में 41 साल बाद न्याय
यह पूरा मामला कानपुर के रहने वाले विजय सिंह से जुड़ा हुआ है। उन्हें साल 1985 में अपने ही भाई की हत्या के एक मामले में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। विजय सिंह ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां सुनवाई पूरी होने में ही 41 साल का लंबा समय लग गया।
हाईकोर्ट ने आखिरकार इसी वर्ष फरवरी में उनकी अपील को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि विजय सिंह केवल तीन महीने ही जेल में रहे। इसके बाद वे जमानत पर बाहर आ गए और लगभग 43 वर्षों तक अपनी अपील के निपटारे का इंतजार करते रहे।
मुकदमों के बोझ से सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ा दबाव
शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में अत्यधिक देरी के कारण ही लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। त्वरित न्याय न मिलने की वजह से ही याचिकाकर्ता यहां आ रहे हैं। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से महत्वपूर्ण सुझाव भी मांगे हैं।
हालांकि, कोर्ट ने तीन दशक से अधिक पुराने मामलों को सिर्फ देरी के आधार पर खत्म करने के विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया। पीठ का मानना है कि केवल समय बीत जाने के आधार पर मुकदमों को खारिज करना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा, क्योंकि इससे जनहित को नुकसान पहुंच सकता है।
72 साल के बुजुर्ग ने बयां किया अपना दर्द
अपनी याचिका में 72 वर्षीय बुजुर्ग विजय सिंह ने बेहद भावुक कर देने वाली बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि इस आपराधिक दोषसिद्धि की छाया के कारण उनका पूरा यौवन, मध्य आयु और अब वृद्धावस्था भी अदालती चक्करों में ही बीत गई। उनकी अपील चार दशकों तक सिस्टम की फाइलों में दबी रही।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मानवीय आधार और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विजय सिंह की जमानत को आगे भी जारी रखने का बड़ा निर्णय लिया है। अदालत अब इस बात पर विचार कर रही है कि देश की न्याय वितरण प्रणाली को कैसे अधिक प्रभावी और तेज बनाया जाए।
Author: Ajay Mishra


