Patna News: बिहार पुलिस अब पुरानी और भारी हथियारों के दौर से निकलकर अत्याधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा रही है। लंबे समय तक इस्तेमाल की गई ‘थ्री नाट थ्री’ राइफल अब इतिहास बन चुकी है। पुलिस मुख्यालय ने जानकारी दी है कि अब विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को पिस्टल जैसे छोटे और प्रभावी हथियार दिए जा रहे हैं, जिन्हें जनता के बीच संभालना अधिक आसान है।
एडीजी (एससीआरबी एवं आधुनिकीकरण) अजिताभ कुमार ने बताया कि जल्द ही विभाग को 3,400 नए पिस्टल मिलने वाले हैं। विशेष इकाइयों जैसे एटीएस और एसटीएफ को ‘ग्लाक पिस्टल’ जैसे आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण के दौरान सात तरह के अत्याधुनिक हथियारों से 50-50 राउंड फायरिंग का विशेष अभ्यास कराया जा रहा है ताकि वे पूरी तरह तैयार रहें।
AI और सॉफ्टवेयर से ‘प्रेडिक्टिव पुलिसिंग’ का लक्ष्य
पुलिस विभाग अब ‘प्रेडिक्टिव पुलिसिंग’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत सॉफ्टवेयर की मदद से अपराध की प्रवृत्ति का विश्लेषण किया जाएगा। इससे पुलिस यह अनुमान लगा सकेगी कि भविष्य में किस तरह की आपराधिक वारदात हो सकती है। इस तकनीक का उद्देश्य अपराध होने से पहले ही उसे रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।
विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार महीनों में राज्य के सभी 1,382 थानों को राष्ट्रीय ‘इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (ICJS) से जोड़ दिया जाएगा। यह प्रणाली देशभर के थानों, अदालतों, जेलों और विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के बीच डेटा के त्वरित आदान-प्रदान में मदद करेगी। इससे किसी भी केस की ट्रैकिंग करना बेहद आसान और पारदर्शी हो जाएगा।
निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अब तक 1,212 थानों में कैमरे इंस्टॉल हो चुके हैं। प्रत्येक थाने में औसतन 12 से 13 कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग को 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। इस निगरानी प्रणाली का कंट्रोल पुलिस मुख्यालय और जिला मुख्यालयों से सीधा जुड़ा हुआ है।
Author: Amit Yadav

