Sirmaur News: उत्तर भारत के सबसे प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर नाहन में रविवार को भव्य रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। श्री जगन्नाथ रथयात्रा मंडल नाहन के अध्यक्ष प्रकाश बंसल ने बताया कि इस वर्ष 12 क्विंटल देसी घी से भगवान के लिए 56 भोग तैयार किए जा रहे हैं।
करीब 1 लाख 25 हजार रुपये की लागत से तैयार हो रहे छप्पन भोग को 56 टोकरियों में सजाया जाएगा। मंदिर परिसर और चौगान मैदान में भगवान को यह विशेष भोग अर्पण किया जाएगा। मंदिर में 10 जुलाई से जारी श्रीमद् भागवत कथा का समापन वीरवार संक्रांति को होगा।
केवट में विराजमान होकर होगी विशेष पूजा
चंडीगढ़ के गोटिया मठ की कीर्तन मंडली इस वर्ष भी रथ यात्रा में भजन कीर्तन करेगी। आगामी 17 व 18 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ जी, श्री बलभद्र जी और माता सुभद्रा को मंदिर से केवट में विराजमान करवाकर विशेष पूजा-अर्चना करवाई जाएगी।
इसके बाद 19 जुलाई को पूर्णाहुति होगी और तीनों देवों को सुंदर पालकियों में विराजमान किया जाएगा। बड़ा चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से पालकियों में भव्य यात्रा शुरू होगी। यह धार्मिक यात्रा हिंदू आश्रम से होते हुए काली स्थान मंदिर पहुंचेगी।
चौगान मैदान में रथ पर सवार होंगे भगवान
काली स्थान मंदिर से नया बाजार होते हुए पालकियां चौगान मैदान पहुंचेंगी। यहां भगवान को पालकियों से निकालकर भव्य रथ में बिठाया जाएगा। इसके बाद भगवान के वस्त्र बदले जाएंगे। फिर विशेष पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान को छप्पन भोग लगाया जाएगा।
इसके बाद मुख्य अतिथि भगवान के मार्ग में झाड़ू लगाकर और रस्सा खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ करेंगे। रथ यात्रा चौगान मैदान से होकर मालरोड, गुन्नूघाट, पक्का टैंक, रानीताल और कच्चा टैंक होते हुए सीधे प्रसिद्ध श्री रघुनाथ मंदिर पहुंचेगी।
मौसी के घर एक घंटा विश्राम करेंगे भगवान
श्री रघुनाथ मंदिर को श्री जगन्नाथ भगवान की मौसी का घर माना जाता है। यहां पर पूरी यात्रा करीब एक घंटे तक विश्राम करेगी। इसके बाद रथ को वहीं छोड़कर दोबारा से वापसी की यात्रा पालकी के जरिए शुरू की जाएगी।
पालकी में सवार होकर यह यात्रा बस स्टैंड की घाटी और छोटा चौक होते हुए वापस बड़ा चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां विधि विधान से यात्रा का समापन होगा। पत्रकार वार्ता में भुवन चंद्र जोशी, जगदीश शास्त्री और गुरमुख सिंह भी मौजूद रहे।

