Puri News: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का पावन महापर्व आज से शुरू हो गया है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के लिए निकल चुके हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं।
रथयात्रा का पूरा शेड्यूल और मुख्य तिथियां
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और अनुष्ठान उप-समिति के शेड्यूल के अनुसार, आज शाम चार बजे से रथों को खींचने का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा। रथयात्रा का समापन 24 जुलाई को बहुदा यात्रा के साथ होगा। इसके बाद 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे अनुष्ठान के साथ इस ऐतिहासिक धार्मिक महापर्व का विधिवत समापन किया जाएगा।
धार्मिक मान्यता और मौसी के घर प्रवास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ हर साल अपने भाई-बहन के साथ मौसी गुंडिचा देवी के घर जाते हैं। वहां भगवान कुछ दिनों तक प्रवास और विश्राम करते हैं। इसके बाद वे दोबारा अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं। रथयात्रा में बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
रवि योग में रथ खींचने का विशेष महत्व
इस साल रथयात्रा के दिन रवि योग का खास संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सियां खींचने से भक्तों को अपार पुण्य मिलता है और जन्मों के पाप कट जाते हैं। भगवान खुद मंदिर से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
तीन भव्य रथों का निर्माण और विशेषताएं
इस पावन यात्रा के लिए नीम की पवित्र लकड़ियों से तीन भव्य रथ बनाए गए हैं। रथयात्रा में सबसे आगे बलराम जी का लाल-हरे रंग का रथ ‘तालध्वज’ चलता है। मध्य में सुभद्रा जी का नीले-काले रंग का रथ ‘दर्पदलन’ होता है। सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का लाल-पीले रंग का मुख्य रथ ‘नंदिघोष’ चलता है।

