Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रोजेक्ट में कथित बेनामी संपत्तियों और धारा 118 के उल्लंघन के आरोपों की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले पर शुक्रवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता विनय शर्मा ने दायर की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष होगी। याचिका में राज्य और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केंद्रीय एजेंसियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
कई वरिष्ठ अधिकारी और एजेंसियां पक्षकार
याचिका में हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के निदेशक, उपायुक्त सोलन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला, नगर आयुक्त सोलन, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और भारत सरकार के मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
इसके अलावा चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ निजी व्यक्तियों और प्रमोटरों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि भूमि खरीद और निवेश से जुड़े कई लेन-देन प्रथम दृष्टया संदेह के घेरे में दिखाई देते हैं। इसलिए स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराना जरूरी है।
आय और जमीन खरीद पर उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि एक कृषक की वार्षिक आय वर्ष 2017 तक लगभग छह लाख रुपये थी। बाद के वर्षों में उसकी आय बढ़कर करीब 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिखाई गई। इसी अवधि में उसने करीब 275 बीघा भूमि खरीदी, जिससे पूरे लेन-देन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोपों के अनुसार खरीदी गई जमीन कृषक की पत्नी और दो बहनों के नाम पर दर्ज की गई। यह भूमि कसौली क्षेत्र के तीन अलग-अलग स्थानों पर खरीदी गई बताई गई है। जब एसडीएम स्तर पर जांच शुरू हुई तो आयकर रिटर्न के आंकड़ों और संपत्ति निवेश के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
लोन भुगतान को लेकर भी बढ़ा संदेह
याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति ने बैंक से करीब आठ करोड़ रुपये का ऋण लिया था। आरोप है कि इस ऋण का भुगतान निर्धारित अवधि से पहले कर दिया गया। सीमित आय और बड़े वित्तीय लेन-देन के बीच असंगति को लेकर याचिकाकर्ता ने विस्तृत जांच की मांग उठाई है।
मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि उपलब्ध आय के मुकाबले इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीदना आर्थिक रूप से संभव नहीं दिखता। इसी भूमि पर चेस्टर हिल प्रोजेक्ट के तहत नए फ्लैट विकसित किए जाने की भी योजना बताई गई है, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया है।
Author: Sunita Gupta


