Shimla News: राजधानी शिमला में नगर निगम और सफाई कर्मियों के बीच विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। सैहब समिति से जुड़े सफाई कर्मियों ने शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने नगर निगम पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और 41 बर्खास्त कर्मियों को बहाल करने की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन और मेयर की ओर से पहले बहाली का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बहाली के वादे पर उठाए सवाल
सैहब समिति के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि निकाले गए कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का भरोसा दिया गया था। समिति ने उसी आश्वासन के आधार पर आंदोलन को कुछ समय के लिए शांत किया था। अब बहाली प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी लगातार अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं। कर्मचारियों का मानना है कि उनकी समस्याओं का समाधान टालने की कोशिश की जा रही है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
चार जून तक जारी रहेगा प्रदर्शन
जसवंत सिंह के अनुसार 4 जून को एजीएम की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। तब तक समिति धरना और प्रदर्शन जारी रखेगी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा और निकाले गए कर्मियों की बहाली को लेकर स्पष्ट निर्णय सामने आएगा।
समिति ने साफ किया है कि यदि एजीएम की बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि 5 जून से सफाई कर्मी दोबारा हड़ताल पर जा सकते हैं, जिससे नगर निगम की सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
फिर बढ़ सकता है निगम और कर्मियों का टकराव
सफाई कर्मियों के नए आंदोलन के बाद नगर निगम और कर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति दोबारा बनती दिख रही है। इससे पहले भी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई बार प्रदर्शन और हड़ताल कर चुके हैं। मौजूदा विवाद ने दोनों पक्षों के बीच संवाद की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल नौकरी से निकाले गए 41 साथियों की बहाली तक सीमित है। वे चाहते हैं कि पहले किए गए वादों को लागू किया जाए। आने वाले दिनों में एजीएम बैठक का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।
Author: Sunita Gupta

