Punjab News: पंजाब रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) ने घर खरीदारों के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रेरा ने साफ किया है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में खून-पसीने की कमाई लगाने वाले आवंटियों के कानूनी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनसे किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता।
प्राधिकरण ने न्यू चंडीगढ़ की एक नामी परियोजना में फ्लैट का कब्जा सौंपने में हुई लंबी देरी को बेहद गंभीर माना है। रेरा ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी बिल्डर को पीड़ित आवंटी के पक्ष में करीब 25 लाख रुपये का भारी-भरकम ब्याज चुकाने का एक बड़ा और कानूनी आदेश जारी किया है।
रेरा ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 18 के तहत घर खरीदारों को मिले अधिकार पूरी तरह से अटूट हैं। किसी भी एग्रीमेंट या परिस्थिति का हवाला देकर खरीदारों को उनके इन मूल अधिकारों से बिल्कुल भी वंचित नहीं किया जा सकता है।
95 फीसदी रकम लेने के बाद भी बिल्डर ने सालों तक अटकाया फ्लैट
यह पूरा मामला सेक्टर-12 स्थित पीईसी परिसर की निवासी नीलम अरोड़ा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने न्यू चंडीगढ़ में स्थित ‘द लेक’ नामक एक आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक कराया था, जिसकी कुल कीमत 74.75 लाख रुपये से अधिक थी। खरीदार ने एकमुश्त भुगतान योजना के तहत बुकिंग के शुरुआती 90 दिनों में ही 95% रकम दे दी थी।
पीड़ित पक्ष के वकील एम शाहनवाज खान ने अदालत को बताया कि इतनी बड़ी रकम हड़पने के बावजूद बिल्डर ने लंबे समय तक खरीदार समझौता (बिल्डर-बायर एग्रीमेंट) निष्पादित नहीं किया। आखिरकार 26 दिसंबर 2022 को एग्रीमेंट किया गया, जिसमें फ्लैट सौंपने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2023 तय की गई थी।
जब तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी आशियाने का कब्जा नहीं मिला, तो खरीदार ने रेरा का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने कोविड-19 महामारी और सरकारी मंजूरियों में हुई देरी का रोना रोया। हालांकि, रेरा की पीठ ने बिल्डर के इन तमाम बहानों और दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला, भू-राजस्व की तरह होगी बकाया वसूली
रेरा सदस्य अरुणवीर वशिष्ठ की पीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का विशेष रूप से उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि आवंटन पत्र दिसंबर 2018 में जारी हुआ था, इसलिए कब्जा हर हाल में 14 दिसंबर 2021 तक मिल जाना चाहिए था। किसी भी ग्राहक को अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।
प्राधिकरण ने आदेश में साफ कर दिया है कि यदि बिल्डर निर्धारित समय के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उससे यह पूरी रकम भू-राजस्व बकाया (लैंड रेवेन्यू) की तरह सख्ती से वसूल की जाएगी। अंतिम गणना के बाद पीड़ित परिवार को करीब 25 लाख रुपये का ब्याज मिलना तय हुआ है।
Author: Gurpreet Singh


