Impeachment Motion: इस्तीफा देने के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस वर्मा? सरकार संसद में ला सकती है महाभियोग प्रस्ताव

Politics News: इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बावजूद सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाने के मूड में नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक जस्टिस वर्मा के इस्तीफे को आधिकारिक रूप से मंजूरी नहीं मिली है।

दावा किया जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र में उन्हें पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा करा सकती है। जस्टिस वर्मा के पूरे मामले की जांच कर रही विशेष समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है।

हालांकि इस जांच समिति की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि इसमें लगे आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया गया है। यही वजह है कि इस्तीफे के बाद भी सरकार इस मामले को तार्किक अंत तक ले जाना चाहती है।

घर में जले हुए नोट मिलने पर शुरू हुई थी कार्रवाई

जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर भारी मात्रा में जले हुए नोट मिलने के बाद उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही शुरू की गई थी। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, यह रिपोर्ट न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत संसद के दोनों सदनों में पेश की जाएगी।

संसद की अगली बैठक आगामी मानसून सत्र में होगी, जो अमूमन जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होता है। लोकसभा स्पीकर ने पिछले साल 12 अगस्त को इस मामले में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था, जिसने अब अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

पिछले साल 14 मार्च की रात को दिल्ली स्थित उनके सरकारी बंगले के एक स्टोर रूम में अचानक आग लग गई थी। इसी दौरान वहां पहुंचे दमकलकर्मियों ने कथित तौर पर भारी मात्रा में अधजले रुपये बरामद किए थे, जिसके बाद हड़कंप मच गया था।

200 से अधिक सांसदों ने किए थे हस्ताक्षर

इस घटना के वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे। मामला सामने आने के बाद उन्हें उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेज दिया गया था। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

इसके बाद जुलाई 2025 में, संसद के 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के महाभियोग प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर कर दिए थे। कानूनी नियमों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी भी जज को केवल संसद द्वारा ही हटाया जा सकता है।

संसद द्वारा बर्खास्त किए जाने की आशंका के बीच ही जस्टिस वर्मा ने पिछले दिनों अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वैसे आधिकारिक तौर पर जस्टिस वर्मा का नाम अभी भी दर्ज है। वह 5 जनवरी, 2031 को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

Author: Harikarishan Sharma

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